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गांवों में विकास के लिए राशि की कमी फिर भी शिविरों के पंडाल पर खर्च किये गए 13 लाख 95 हजार!

खैरागढ़। गांवों में सड़क, नाली और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए राशि की कमी का हवाला दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर विभिन्न शिविरों और आयोजनों की व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। जनपद पंचायत खैरागढ़ के रिकॉर्ड के अनुसार जनसमस्या निवारण शिविर, राज्यपाल के गोद ग्राम सोनपुरी में आयोजित कार्यक्रम और सुशासन तिहार की व्यवस्थाओं पर 10.77 लाख रुपये से अधिक का भुगतान दर्ज है। वहीं, समाज कल्याण विभाग ने सोनपुरी में शिविर के लिए अलग से 3.17 लाख रुपये खर्च किए हैं। दोनों विभागों का कुल खर्च 13 लाख 95 हजार 78 रुपये बताया गया है। इस खर्च की प्राथमिकता, भुगतान और वास्तविक व्यवस्थाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं।

जनपद पंचायत के रिकॉर्ड के मुताबिक ग्राम गातापार जंगल और सिंघौरी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के लिए क्रमशः 1.59 लाख और 1.41 लाख रुपये का भुगतान किया गया वहीं सोनपुरी में राज्यपाल के आगमन के दौरान शमियाना, वाटरप्रूफ पंडाल, मंच सहित अन्य व्यवस्थाओं पर 6.19 लाख रुपये खर्च दर्ज हैं। सुशासन तिहार के आयोजन के लिए भी 1.57 लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त समाज कल्याण विभाग ने सोनपुरी में शिविर आयोजन के लिए 3.17 लाख रुपये खर्च किए।

एक सरपंच ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा कि गांवों में छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए राशि जुटाना मुश्किल हो रहा है जबकि आयोजनों की व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने खर्च की जांच की मांग करते हुए अनियमितता की आशंका जताई है।हालांकि कमीशनखोरी संबंधी आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस के जनपद सदस्य आकाशदीप गोल्डी ने भी भुगतान की निष्पक्ष जांच की मांग की। जनपद सदस्य खेमराज जैन ने कहा कि उन्हें खर्च की जानकारी नहीं है और भुगतान हुआ है तो जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

जनपद पंचायत के सीईओ हिमांशु गुप्ता ने बताया कि जनसमस्या निवारण शिविर और सोनपुरी में राज्यपाल के आगमन की व्यवस्थाओं का भुगतान लोक निर्माण विभाग, दुर्ग मंडल के अधीक्षण अभियंता द्वारा अनुमोदित दरों के आधार पर किया गया है। खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए जिला पंचायत केसीजी को पत्र भेजे गए हैं और राशि का आबंटन अपेक्षित है।सीईओ श्री गुप्ता के अनुसार संबंधित नस्ती और भुगतान प्रमाणक कार्यालयीन रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। बहरहाल अब इन भुगतानों की वास्तविकता और खर्च के औचित्य को लेकर जांच की मांग उठ रही है।

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