
विद्यार्थियों को स्वस्थ डिजिटल जीवनशैली अपनाने का संदेश
‘द आर्ट ऑफ बीइंग हैप्पी’ विषय के तहत हुआ आयोजन
डिजिटल उपकरणों के संतुलित उपयोग और मानसिक कल्याण पर हुई चर्चा
गंडई-पंडरिया। वर्तमान डिजिटल युग में मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। जहां इन माध्यमों ने शिक्षा, सूचना और संवाद को सरल बनाया है, वहीं इनके अत्यधिक उपयोग से समय प्रबंधन, एकाग्रता, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव भी चिंता का विषय बन रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर स्थित शासकीय महाविद्यालय गंडई में अर्थशास्त्र विभाग के तत्वावधान में ‘द आर्ट ऑफ बीइंग हैप्पी’ विषय के अंतर्गत डिजिटल डिटॉक्स, स्वस्थ डिजिटल आदतें एवं मानसिक कल्याण पर अंतरविभागीय व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीक का संतुलित उपयोग करने तथा डिजिटल गतिविधियों के साथ अपने दैनिक जीवन में उचित सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य टी.एल. वर्मा ने की। इस अवसर पर जी.के. कौशिक, आसित साहू एवं डॉ.दिलेश्वरी साहू की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कंप्यूटर विज्ञान विभाग के दीपांशु यादव ने विद्यार्थियों को डिजिटल डिटॉक्स की अवधारणा, इसके महत्व तथा स्वस्थ डिजिटल व्यवहार अपनाने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। मुख्य वक्ता दीपांशु यादव ने अपने व्याख्यान में बताया कि आज विद्यार्थी पढ़ाई, जानकारी प्राप्त करने, मनोरंजन और आपसी संवाद के लिए बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरणों का उपयोग करते हैं। तकनीक ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं उपलब्ध कराई हैं लेकिन बिना आवश्यकता लंबे समय तक मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनावश्यक स्क्रीन टाइम कम करने, मोबाइल के उपयोग के लिए समय निर्धारित करने तथा पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकाने वाले डिजिटल माध्यमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल उपकरणों का विवेकपूर्ण उपयोग व्यक्ति की कार्यक्षमता और एकाग्रता बनाए रखने में सहायक हो सकता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे तकनीक को अपनी पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास का साधन बनाएं न कि अपना अधिकतर समय इसी में व्यतीत करें।
मानसिक स्वास्थ्य और संतुलित दिनचर्या पर जोर
व्याख्यान के दौरान मानसिक कल्याण और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि अच्छी नींद, नियमित शारीरिक गतिविधियां, पर्याप्त विश्राम और परिवार एवं मित्रों के साथ सार्थक संवाद जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने के महत्वपूर्ण आधार हैं। डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक उपयोग के कारण यदि इन गतिविधियों के लिए समय कम होने लगे, तो अपनी दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करना चाहिए
डिजिटल डिटॉक्स का उद्देश्य तकनीक से दूरी नहीं, बल्कि संतुलन
कार्यक्रम में डिजिटल डिटॉक्स के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए बताया गया कि इसका उद्देश्य तकनीक का पूरी तरह त्याग करना नहीं है, बल्कि उसके अनावश्यक उपयोग को नियंत्रित कर जीवन में संतुलन स्थापित करना है। डिजिटल उपकरणों का सही उपयोग शिक्षा, ज्ञान और कौशल विकास के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं जरूरत से ज्यादा स्क्रीन पर समय बिताने के बजाय खेलकूद, पुस्तक अध्ययन, रचनात्मक गतिविधियों और प्रत्यक्ष सामाजिक संवाद के लिए भी समय निकालना आवश्यक है।
