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चार सूत्रीय मांगों को लेकर जिलेभर के पटवारी हड़ताल पर, राजस्व के कामकाज में हो रही परेशानी

खैरागढ़। राजस्व विभाग के पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जिलेभर में व्यापक असर देखने को मिल रहा है। चार सूत्रीय मांगों को लेकर जारी इस आंदोलन के चलते राजस्व विभाग के कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। एक ओर प्रशासनिक स्तर पर कुछ विभागीय कार्य भी ठप पड़े हैं वहीं दूसरी ओर आम लोगों को भी आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, बंटवारा और नामांतरण जैसे जरूरी कार्यों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। हड़ताल का असर धान फसल के डिजिटल सर्वे पर भी पड़ रहा है। स्थिति यह है कि प्रशासन को फसलों का सर्वे कराने के लिए निजी सर्वेयरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिले के 102 पटवारी हल्कों में फिलहाल केवल 59 पटवारी पदस्थ हैं।*हड़ताल खत्म नहीं हुई तो बढ़ेंगी आम लोगों की मुश्किलें*पटवारियों की हड़ताल के कारण छात्र, किसान और जमीन मालिक अपने जरूरी कामों के लिए भटकने को मजबूर हैं। राजस्व संबंधी कार्यों के साथ ही विभागीय प्रतिवेदन तैयार करने जैसे प्रशासनिक काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इसके चलते तहसील और एसडीएम कार्यालयों में कई प्रकरण लंबित पड़े हैं। हड़ताल लंबी खिंचने पर आम लोगों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है।

हड़ताल के चलते सबसे अधिक परेशानी धान फसल के डिजिटल सर्वे को लेकर सामने आ रही है। प्रशासन निजी सर्वेयरों के माध्यम से सर्वे कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया में किसी तरह की त्रुटि होने पर उसकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पटवारियों का कहना है कि सर्वे की प्रक्रिया में आने वाली खामियों का ठीकरा अंततः उन्हीं पर फूट सकता है वहीं आम लोगों के निजी कार्य अटके होने से जमीन संबंधी मामलों का निराकरण भी लगभग ठप हो गया है। इसके अलावा भू-अभिलेख, भूमि सर्वेक्षण, गणना, कृषि एवं लगानी भूमि से जुड़े कार्यों सहित निर्वाचन, राहत और आपदा प्रबंधन संबंधी गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।

पटवारी संघ अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। इनमें पीवी एप पर काम का बहिष्कार, दमनात्मक निलंबन एवं स्थानीयकरण की कार्रवाई को बिना शर्त वापस लेने, वेतन विसंगति दूर करने तथा राजस्व निरीक्षक के पद पर विभागीय पदोन्नति करने की मांग प्रमुख हैं। पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कांडे ने बताया कि पीवी एप की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किए बिना पटवारियों पर इसके माध्यम से काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। कई खसरों के नक्शों में बटांकन उपलब्ध नहीं होने के कारण धान फसल का डिजिटल सर्वे करने में भी परेशानी आ रही है। उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन देने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन अब तक सरकार ने इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई है। मांगों का निराकरण होने तक आंदोलन जारी रहने की स्थिति में राजस्व संबंधी कार्यों पर इसका असर और गहरा सकता है।

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