
तीन साल बाद भी नए जिले को विभागीय सेटअप नहीं दे सकी प्रदेश सरकार
खैरागढ़। खैरागढ़ जिले के गठन के तीन साल बाद भी जिला स्तरीय विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों का स्वीकृत सेटअप पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। इसे लेकर विधायक यशोदा वर्मा ने प्रदेश सरकार पर नए जिले की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी के चलते जिले में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला कार्यालय के साथ ही कृषि, खनिज, राजस्व और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों में पर्याप्त अमले की कमी बनी हुई है। स्थिति यह है कि जिला कार्यालय का कामकाज भी शिक्षा विभाग के बाबुओं के भरोसे संचालित हो रहा है। अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त किए जाने के बाद भी शिक्षा विभाग के कर्मचारी स्कूलों की जिम्मेदारियों के साथ जिला कार्यालय का काम संभाल रहे हैं। वहीं जिला कार्यालय में संचालित खनिज, कृषि, राजस्व सहित अन्य प्रमुख विभागों में अब तक आवश्यक विभागीय सेटअप लागू करने की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर जिलेवासियों के कामकाज पर पड़ रहा है।विधायक यशोदा वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं होने के कारण नए जिले के गठन की मूल परिकल्पना पूरी नहीं हो सकी है। जिले के लोगों को प्रशासनिक सुविधाओं का जो लाभ मिलना चाहिए था, वह अब तक नहीं मिल पाया है।
कर्मचारियों का सेटअप लागू करने में गंभीर नहीं सरकार
विधायक वर्मा ने कहा कि जिला गठन के बाद स्थानीय लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और विभागों में अधिकारियों-कर्मचारियों की पर्याप्त नियुक्ति करने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। इसके बावजूद विष्णुदेव साय सरकार जिला स्तरीय व्यवस्था को मजबूत करने और विभागीय सेटअप लागू करने के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है। यही वजह है कि जिले में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। पर्याप्त अमला नहीं होने से विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है और लोगों को अपने जरूरी कार्यों के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
एक एसडीएम के भरोसे दो अनुविभाग, व्यवस्था प्रभावित
जिले में अधिकारियों की कमी का असर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। खैरागढ़ और छुईखदान, दोनों अनुविभागों की जिम्मेदारी एक ही एसडीएम के पास होने से कामकाज का दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा जिले में केवल दो प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर पदस्थ हैं। ऐसे में प्रशासनिक कार्यों के प्रभावी संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विधायक यशोदा वर्मा ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय जिले में पर्याप्त संख्या में अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर पदस्थ थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अधिकारियों की कमी के कारण जिला स्तरीय प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

