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भाजपा की साय सरकार सुशासन नहीं, सिर्फ प्रचार का तिहार मना रही- मनराखन

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे “सुशासन तिहार” को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा है। कांग्रेस के सक्रिय और लोकप्रिय नेता मनराखन देवांगन ने इसे जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने वाला दिखावटी अभियान बताते हुए कहा कि सरकार जमीनी काम करने के बजाय केवल प्रचार-प्रसार में व्यस्त है। श्री देवांगन का कहना है कि यदि प्रदेश में वास्तव में सुशासन होता तो लोगों को सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले सहित प्रदेश के कई गांव आज भी बदहाल सड़कों, पेयजल संकट और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं लेकिन सरकार केवल आयोजनों और कार्यक्रमों के जरिए अपनी छवि चमकाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” के नाम पर अधिकारी-कर्मचारियों पर दबाव बनाकर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। शिकायतों का स्थायी समाधान करने के बजाय उन्हें कागजों में निपटाया जा रहा है। लोगों से आवेदन तो लिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान नजर नहीं आ रहा। कांग्रेस नेता ने केसीजी जिले की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नया जिला बनने के बाद लोगों को विकास की बड़ी उम्मीद थी लेकिन आज भी कई विभाग संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र बदहाल हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा और किसान अपनी उपज के उचित दाम के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मनराखन ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में अधिकारी-कर्मचारियों की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने उन्हें खुली छूट दे दी है। उन्होंने जिले में बढ़ते अपराध और अवैध शराब के कारोबार पर भी सरकार को घेरा और कहा कि गांव-गांव शराब दुकानें खुल रही हैं और गली-गली शराब की बिक्री हो रही है लेकिन शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य की ओर सरकार का ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है और अब “सुशासन तिहार” के जरिए अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है। सरकार को पहले जिले और प्रदेश की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उसके बाद सुशासन की बात करनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि बीते वर्षों में लोगों ने बड़ी उम्मीद के साथ अपनी मांगें और शिकायतें प्रशासन तक पहुंचाई लेकिन आज भी अनेक मामले अधूरे पड़े हैं। सड़क, पानी, बिजली, राजस्व और आवास जैसी बुनियादी मांगों को लेकर लोग अब भी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हर बार अधिकारियों द्वारा आश्वासन तो दिया जाता है लेकिन कार्रवाई फाइलों तक सीमित रह जाती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिकायतों का समयबद्ध निराकरण नहीं हुआ तो ऐसे आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे। जनता अब कागजी दावों के बजाय जमीन पर दिखाई देने वाला समाधान चाहती है।

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