Uncategorized

महिलाओं को पता नहीं, नाम पर चढ़ गया कर्ज

खैरागढ़। जिले के ग्राम पंचायत सलोनी में बिहान महिला समूह के वित्तीय लेनदेन और कथित ऋण अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ने लगा है। समूह की महिलाओं ने पिछले चार वर्षों की बचत, बैंक खातों में हुए लेनदेन, सामग्री खरीदी-वितरण और उनके नाम पर दर्ज ऋण का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। महिलाओं का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर 60-60 हजार रुपये का ऋण दर्ज कर दिया गया है। ऋण किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुआ, राशि किसे मिली और समूह की बचत का उपयोग कहां किया गया, इन सवालों के जवाब नहीं मिलने से सदस्यों में नाराजगी है। महिलाओं ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, बचत की आदत विकसित करने और स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला समूहों का गठन किया जाता है। सलोनी गांव की समूह सदस्यों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से उन्हें समूह की वित्तीय गतिविधियों, जमा बचत राशि, ब्याज और योजना के तहत मिलने वाले लाभों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। महिलाओं के मुताबिक, उन्हें बाद में जानकारी मिली कि उनके व्यक्तिगत दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम पर 60-60 हजार रुपये का ऋण दर्ज है। उनका दावा है कि उन्हें न तो ऋण लेने की प्रक्रिया की जानकारी थी और न ही ऋण की राशि मिलने के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। ऐसे में ऋण आवेदन, बैंक रिकॉर्ड, स्वीकृति प्रक्रिया और राशि के वास्तविक वितरण की निष्पक्ष जांच किए जाने की जरूरत है।

महिलाओं ने वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए केवल ऋण के मामले में ही सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि समूह के माध्यम से पिछले चार वर्षों में किए गए सभी लेनदेन का विवरण भी मांगा है। उनका आरोप है कि इस दौरान साड़ी, टिफिन बॉक्स और अन्य सामग्री का वितरण किया गया, लेकिन खरीदी पर खर्च की गई राशि तथा सामग्री प्राप्त करने वाले सदस्यों की जानकारी स्पष्ट रूप से साझा नहीं की गई।समूह की महिलाएं बचत राशि, ब्याज, बैंक खातों से निकासी और सामग्री की खरीदी एवं वितरण से संबंधित पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि पहले चार वर्षों का हिसाब सदस्यों के सामने रखा जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि समूह के नाम पर जमा राशि का उपयोग किन कार्यों में किया गया। महिलाओं के अनुसार, दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

विवाद के बीच चार वर्षों के हिसाब-किताब को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जानी थी। महिलाओं का आरोप है कि बैठक की कवरेज के लिए स्थानीय पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के पहुंचने के बाद अचानक बैठक स्थगित या रद्द कर दी गई। उनके मुताबिक, मीडिया के पहुंचने की सूचना कुछ पदाधिकारियों को फोन के माध्यम से दी गई, जिसके बाद संबंधित पदाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। बैठक रद्द होने की घटना के बाद महिलाओं की नाराजगी और बढ़ गई है। उनका सवाल है कि यदि समूह का वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित और स्पष्ट है, तो सदस्यों के सामने हिसाब प्रस्तुत करने में परेशानी क्यों हो रही है। महिलाओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर ऋण और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है। इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, बैठक रद्द होने के कारणों और सचिव की भूमिका के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पदाधिकारियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष भी सामने नहीं आया है।

बिहान महिला समूह से जुड़े इस मामले में महिलाओं की प्रमुख मांग है कि उनके नाम पर दर्ज ऋण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, पिछले चार वर्षों के वित्तीय लेनदेन का पूरा ब्योरा सदस्यों को उपलब्ध कराया जाए और साड़ी, टिफिन बॉक्स सहित अन्य सामग्री की खरीदी-वितरण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और महिलाओं को उनके सवालों का जवाब कब तक मिल पाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page