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अंचल में आज जगह-जगह विराजेंगे विघ्नहर्ता, गणेशोत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश के स्वागत के लिए खैरागढ़ अंचल तैयार है। सोमवार 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर जिलेभर में जगह-जगह गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। पर्व को लेकर शहर से लेकर गांवों तक गणेशोत्सव समितियां तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। पंडालों को आकर्षक रूप देने के साथ विद्युत सजावट, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारियां भी की जा रही हैं। खैरागढ़, छुईखदान और गंडई के अलावा साल्हेवारा, उदयपुर, दनिया, बुंदेली, सड़क अतरिया, बाजार अतरिया, जालबांधा, पांडादाह, मुढ़ीपार और ठेलकाडीह सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भी गणेशोत्सव को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर समितियों ने आकर्षक पंडाल तैयार किए हैं वहीं कुछ स्थानों पर विशेष थीम के साथ सजावट की जा रही है। गौर करें कि गणेशोत्सव को लेकर सबसे अधिक उत्साह किशोरों और युवाओं में देखने को मिल रहा है। समितियों के सदस्य पंडाल निर्माण, विद्युत सजावट और आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। अगले दस दिनों तक अंचल में धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी दौर चलेगा। गणेश चतुर्थी के साथ ही बाजार में भी पर्व की रौनक बढ़ गई है। गणेश प्रतिमाओं, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की दुकानों पर खरीदारों की आवाजाही बढ़ी है वहीं मिष्ठान दुकानों में मोदक सहित विभिन्न मिठाइयों की मांग बढ़ने लगी है।

गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7:07 बजे से प्रारंभ होगी। गणेश पूजन के लिए सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी अवधि में विधि-विधान से भगवान श्रीगणेश की पूजा और स्थापना करना शुभ माना जाता है।

पूजन विधि से संबंधित जानकारी के अनुसार चतुर्थी तिथि 15 सितंबर 2026 की सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। इसके बाद गणेशोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन समितियों द्वारा किया जाएगा।

गणेशोत्सव के समापन पर शुक्रवार 25 सितंबर को गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इसी दिन परंपरा अनुसार अनंत चतुर्दशी का पर्व भी मनाया जाएगा। विसर्जन के दौरान समितियों और प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालु प्रतिमाओं को विदाई देंगे।

गणेश चतुर्थी को लेकर बाजार भी पूरी तरह तैयार है। गणेश प्रतिमाओं के साथ पूजा सामग्री, फूल-माला, सजावटी सामान और विद्युत झालरों की खरीदारी के लिए लोग बाजार पहुंच रहे हैं। मिष्ठान दुकानों में भगवान श्रीगणेश को प्रिय माने जाने वाले मोदक की विशेष मांग है। पर्व के चलते बाजार में भी उत्सवी माहौल दिखाई देने लगा है।

गणेशोत्सव अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवाओं और स्थानीय नागरिकों द्वारा गणेशोत्सव समितियां गठित कर आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। कई गांवों में पंडाल सज चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर अंतिम तैयारियां जारी हैं। धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी पर्व से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

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