
खैरागढ़ की नेशनल लोक अदालत में 50,537 प्रकरण निराकृत, पक्षकारों को 1.68 करोड़ से अधिक के अवार्ड का लाभ
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। विवादों के त्वरित और आपसी सहमति से समाधान की दिशा में आयोजित नेशनल लोक अदालत में खैरागढ़ ने उल्लेखनीय परिणाम दर्ज किया। 12 सितंबर को तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ में आयोजित लोक अदालत में न्यायालयों के साथ राजस्व एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निराकरण किया गया। भौतिक सुनवाई के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध रहने से पक्षकारों को अपने मामलों के समाधान के लिए सहज मंच मिला। नेशनल लोक अदालत में कुल 50,537 प्रकरणों का निराकरण हुआ और 1 करोड़ 68 लाख 70 हजार 251 रुपए का कुल अवार्ड पारित किया गया। बड़ी संख्या में मामलों का समाधान आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर हुआ जिससे पक्षकारों को न्यायालयीन प्रक्रिया में लगने वाले समय और खर्च से राहत मिली। जिला एवं अपर सत्र न्यायालय में 19 प्रकरणों का निपटारा किया गया। इनमें दावा प्रकरणों क्रिमिनल कंपाउंडेबल मामलों आर्बिट्रेशन सिविल एवं अन्य प्रकरणों में पक्षकारों की सहमति से अवार्ड पारित किए गए। अकेले दावा प्रकरणों में 31 लाख रुपए की अवार्ड राशि रही जबकि अन्य प्रकरणों में भी महत्वपूर्ण राशि के साथ समझौते हुए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में ट्रैफिक चालान के 569 मामलों का निराकरण हुआ। इसके अलावा पेटी ऑफेंस से जुड़े 147 प्रकरण और एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के मामले भी समझौते के जरिए निपटाए गए। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय में भी ट्रैफिक चालान पेटी ऑफेंस क्रिमिनल कंपाउंडेबल, सिविल और चेक बाउंस से संबंधित प्रकरणों में पक्षकारों को राहत मिली। लोक अदालत की सबसे बड़ी हिस्सेदारी राजस्व न्यायालयों के प्रकरणों की रही। यहां 49,511 मामलों का निराकरण करते हुए 24 लाख 54 हजार 250 रुपए का अवार्ड पारित किया गया। वहीं प्री-लिटिगेशन स्तर पर बीएसएनएल और नगर पालिका से संबंधित प्रकरणों का भी समाधान किया गया। लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए तालुक विधिक सेवा समिति द्वारा पहले से प्री-सिटिंग कराई गई थी। इसके माध्यम से पक्षकारों को विवाद को लंबा खींचने के बजाय आपसी सुलह और राजीनामे के माध्यम से समाप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजन में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मोहनी कंवर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि शर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा खलखो सहित न्यायालयीन स्टाफ पैरालीगल वालंटियर और अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका रही। देवेन्द्र चंदेल, दिनेश शर्मा, चंदन साहू, मनोहर देवांगन, आरके लांझकर, उमेश राजपूत सहित न्यायिक कर्मचारियों तथा गोलूदास साहू, कला प्रजापति छबिराज सहित पैरालीगल वालंटियर और सुलहकर्ता अधिवक्ताओं ने लोक अदालत की प्रक्रिया को सफल बनाने में सहयोग दिया।
