
कटाई के बाद दिख रहा हसदेव जैसा मंजर

116 एकड़ क्षेत्र में सैकड़ों बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई
बिना अनुमति पेड़ों की कटाई से उठ रहे सवाल
सत्यमेव न्यूज खैरागढ। जिले के छुईखदान ब्लॉक के ग्राम पंचायत भोथली के आश्रित गांव खम्हारडीह स्थित सघन वन क्षेत्र में बेशकीमती लकड़ियों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। क्षेत्र के फेफड़े माने जाने वाले इस वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई ने ग्रामीणों, पर्यावरण प्रेमियों और प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि लगभग 116 एकड़ निजी भूमि की आड़ लेकर सैकड़ों हरे-भरे एवं बहुमूल्य वृक्षों को काटा जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि जिस क्षेत्र में अंधाधुंध कटाई जारी है वहां अब तक किसी प्रकार की विभागीय अनुमति अथवा ट्रांजिट परमिट (टीपी) जारी नहीं किया गया है। ऐसे में मामला केवल अवैध कटाई तक सीमित न रहकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
सीमांकन के बाद तेज हुई है वृक्षों की कटाई
सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पूर्व ही राजस्व विभाग द्वारा संबंधित भूमि का सीमांकन किया गया था। सीमांकन प्रक्रिया पूरी होते ही जंगल के भीतर भारी मशीनें और मजदूर सक्रिय हो गए। इसके बाद साजा, बीजा, तिनसा, बांस और भीरा जैसे बहुमूल्य एवं संरक्षित वृक्षों की तेजी से कटाई शुरू कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रफ्तार से जंगल साफ किया जा रहा है उससे पूरा इलाका धूल और वीरानी में तब्दील होता जा रहा है। कई लोगों ने इस स्थिति की तुलना हसदेव अरण्य में हुए विवादित वन कटाई प्रकरण से करते हुए इसे “हसदेव पार्ट-2” बताया है।

वन विभाग पर लग रहे निष्क्रियता के आरोप
सूत्रों के मुताबिक स्थानीय वन अमले को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है। मैदानी कर्मचारियों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई है लेकिन अब तक मौके पर कोई बड़ी जांच टीम नहीं पहुंची है और न ही कटाई रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई दिखाई दी है वहीं सीमांकन प्रक्रिया से जुड़े राजस्व विभाग के अधिकारी और हल्का पटवारी भी मामले पर खुलकर कुछ बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। इससे ग्रामीणों के बीच संदेह और गहरा गया है कि आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई किसके संरक्षण में संचालित हो रही है।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर मंडराया खतरा
ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में पूरा क्षेत्र बंजर होने की कगार पर पहुंच सकता है। जंगलों के तेजी से समाप्त होने का असर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और स्थानीय पर्यावरण संतुलन पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
एसडीएम बोले- नहीं ली गई है कोई अनुमति
मामले में छुईखदान-गंडई के एसडीएम अविनाश ठाकुर ने कहा कि खम्हारडीह जंगल में पेड़ कटाई की सूचना मिलने के बाद जांच के लिए आरआई, पटवारी और वन विभाग की संयुक्त टीम भेजी गई है जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है वहां किसी भी प्रकार की विभागीय अनुमति नहीं ली गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अनुमति नहीं ली गई तो आखिर जंगल में यह ‘हरा कत्लेआम’ किसके इशारे पर जारी है?

