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कागजों में सिमटीं नवीन सहकारी समितियां, खाद-बीज के लिए भटक रहे किसान

सत्यमेव न्यूज गंडई-पंडरिया। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा वाहवाही लूटने के लिए आनन-फानन में सेवा सहकारी समितियों का विखंडन तो कर दिया गया लेकिन धरातल पर ये नवीन समितियां पूरी तरह से बेपटरी साबित हो रही हैं। सरकार के इस अदूरदर्शी फैसले का सीधा खामियाजा अब क्षेत्र के अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। खरीफ सीजन सिर पर है लेकिन गंडई-पंडरिया क्षेत्र की नई समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों के किसान खाद और बीज की एक-एक बोरी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ​इस गंभीर अव्यवस्था और किसानों की बदहाली को लेकर सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रदेश किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल ने एक तीखी प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। उन्होंने शासन-प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ और लचर कार्यप्रणाली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की है।

​किसान नेता रणजीत सिंह चंदेल ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि सरकार ने नई समितियां घोषित करने में तो जल्दबाजी दिखाई लेकिन वहां न तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति की गई है और न ही इन समितियों के संचालन के लिए खुद का कोई भवन या कार्यालय तय है। बिना किसी बुनियादी ढांचे के कागजों पर खोली गईं ये नवीन समितियां आज महज एक शो-पीस बनकर रह गई हैं जिससे किसानों की सुगमता के बजाय उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।

​जब परेशान और आक्रोशित किसान खाद-बीज की मांग को लेकर संबंधित अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं तो वहां से तकनीकी लाचारी का रोना रोया जा रहा है। समितियों के प्रभारियों का साफ कहना है कि नवीन सेवा सहकारी समितियों की अभी तक आधिकारिक ‘आईडी’ ही जेनरेट नहीं हो पाई है। सिस्टम में आईडी सक्रिय न होने के कारण, मांग (डिमांड) भेजने के बावजूद उच्च संस्थाओं व संघों द्वारा हमें खाद-बीज प्रदाय नहीं किया जा रहा है। जब हमारे पास स्टॉक ही नहीं पहुंचेगा तो हम किसानों को क्या बांटेंगे?” ​इस प्रकार स्थानीय अधिकारी और कर्मचारी तकनीकी खामियों की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारियों से साफ पल्ला झाड़ रहे हैं जिससे व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।

​क्षेत्र में मानसून की आहट और बोनी का समय बेहद नजदीक है। किसानों का कहना है कि अगर सही समय पर खेतों में खाद और उन्नत बीज का उठाव नहीं हुआ तो पूरी फसल चक्र प्रभावित हो जाएगी और उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। एक तरफ खेतों को तैयार करने की चुनौती है वहीं दूसरी तरफ सरकारी लेट-लतीफी के कारण किसान सोसायटियों के चक्कर काट-काटकर खाली हाथ लौटने को विवश हैं।

​रणजीत सिंह चंदेल ने शासन-प्रशासन को चेताया है कि यदि समय रहते किसानों की सुध नहीं ली गई तो आक्रोशित होकर किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है। नवीन सेवा सहकारी समितियों की तकनीकी कमियों और आईडी क्रिएशन के कार्य को युद्ध स्तर पर 24 घंटे के भीतर पूरा किया जाए। गंडई-पंडरिया क्षेत्र की सभी नई सोसायटियों में खाद और उन्नत बीजों का तत्काल व पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित हो। ​किसानों को उनके नजदीकी केंद्रों में बिना किसी कतार या परेशानी के इनपुट सामग्री का वितरण शुरू किया जाए।

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