ठेलकाडीह में शिक्षिका की मौत के बाद व्यवस्था पर सवाल, एंबुलेंस थी तो फिर इलाज में क्यों हुई देरी?

बस स्टैंड के मिनीमाता चौक हादसे ने खोली बदहाल यातायात व्यवस्था की पोल
सड़क किनारे अतिक्रमण और बेलगाम रफ्तार पर कार्रवाई का इंतजार
खैरागढ़। ठेलकाडीह के मिनीमाता चौक पर तेज रफ्तार इको वाहन की चपेट में आने से शिक्षिका की मौत और दो स्कूली छात्राओं के घायल होने की घटना ने अब केवल यातायात व्यवस्था ही नहीं बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरकामटोला में एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध थी तो गंभीर रूप से घायलों को समय पर उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने में देरी क्यों हुई? प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे के बाद घायल शिक्षिका तथा दोनों छात्राओं को स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों की मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इसी दौरान एंबुलेंस चालक के समय पर उपलब्ध नहीं होने और वाहन की स्थिति को लेकर सवाल उठे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन घटना ने आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की जरूरत जरूर पैदा कर दी है। मामले को लेकर मंडल भाजपा अध्यक्ष भोज बंजारे ने भी ठेलकाडीह क्षेत्र में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सहित यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से की है।
दुर्घटना महज हादसा या व्यवस्था की अनदेखी का नतीजा?
मिनीमाता चौक और ठेलकाडीह बस स्टैंड क्षेत्र में सड़क किनारे अतिक्रमण और बेतरतीब ढंग से संचालित दुकानों के कारण पहले से ही यातायात प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्टेट हाईवे के किनारे वाहनों और दुकानों की गतिविधियों के बीच राहगीरों और बस का इंतजार करने वाले यात्रियों के लिए पर्याप्त सुरक्षित स्थान नहीं बचता। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों का खतरा और बढ़ जाता है वही शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालको की इस क्षेत्र में बहुतायत है जिसे लेकर परस्पर जांच तथा कड़ी कार्रवाई की भी मांग उठ रही है। ज्ञात हो कि सोमवार 5 अक्टूबर को भी रोज की तरह शिक्षिका किरण मनीष तिवारी और दोनों छात्राएं सड़क किनारे बस का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार इको वाहन के चालक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि संवेदनशील चौराहे और बस स्टैंड क्षेत्र में वाहनों की गति नियंत्रित करने तथा पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
बड़ा सवाल- कार्रवाई हादसे के बाद ही क्यों?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात की समस्या नई नहीं है। बावजूद इसके दुर्घटना की आशंका वाले इस क्षेत्र में स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के साथ ही मिनीमाता चौक पर गति नियंत्रण, यातायात संकेतक, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षित पैदल क्षेत्र की व्यवस्था करे। इधर एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों की भी जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती कुछ समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद यदि तकनीकी अथवा चालक संबंधी कारणों से सेवा समय पर नहीं मिलती है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। गौर करें कि अब सवाल सिर्फ हादसे की जांच का नहीं बल्कि उन व्यवस्थाओं की जवाबदेही तय करने का भी है जिनकी खामियों के कारण भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। बहरहाल इस दुर्घटना ने अपने साथ कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां और सवाल छोड़ दिए हैं।


