
आमने-सामने आए दोनों पक्ष
पंचों ने लगाया बैठक के बाद प्रस्ताव जोड़ने का आरोप
नियमों के तहत हुई पूरी प्रक्रिया- सचिव
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। ग्राम पंचायत जुरलाकला में जैतखाम निर्माण को लेकर पंचायत प्रस्ताव की वैधता पर विवाद गहरा गया है। कुछ पंचों ने आरोप लगाया है कि 17 दिसंबर 2025 की पंचायत बैठक में केवल 13 एजेंडों पर चर्चा हुई थी, जबकि बैठक समाप्त होने और हस्ताक्षर होने के बाद कथित रूप से प्रस्ताव क्रमांक-14 जोड़कर जैतखाम निर्माण के लिए अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से पांच लाख रुपये की स्वीकृति ली गई। मामले की शिकायत एसडीएम न्यायालय में लंबित है। बुधवार को सुनवाई निर्धारित थी लेकिन एसडीएम की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
पंच बोले- निर्माण का नहीं, सार्वजनिक मैदान के चयन का विरोध
शिकायतकर्ता पंचों का कहना है कि उनका विरोध जैतखाम निर्माण से नहीं बल्कि सार्वजनिक मैदान में इसके निर्माण से है। उनका कहना है कि यह मैदान हाट-बाजार, खेलकूद और सामाजिक आयोजनों के लिए उपयोग होता है। उनका सुझाव है कि जैतखाम का निर्माण सतनाम भवन के समीप कराया जाए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में प्रतिमा को लेकर विवाद हो चुके हैं इसलिए भविष्य में सामाजिक तनाव से बचने के लिए स्थान परिवर्तन आवश्यक है।
समाज का पक्ष- प्रतिमा के पास ही बने जैतखाम
सतनामी समाज के सेक्टर अध्यक्ष ओम प्रकाश टंडन ने कहा कि समाज की इच्छा है कि जैतखाम का निर्माण पहले से स्थापित मिनी माता की प्रतिमा के समीप ही हो। उनके अनुसार सतनाम भवन के पास पर्याप्त जगह नहीं है और प्रस्ताव पंचायत स्तर पर पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि लगभग 10 से 12 फीट क्षेत्र में होने वाले निर्माण से सार्वजनिक गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फाग प्रतियोगिता के दौरान विवाद होने की बात उन्होंने स्वीकार की लेकिन क्रिकेट खेलते समय प्रतिमा से गेंद टकराने की घटना से इनकार किया। सचिव ने आरोपों को बताया निराधार
तत्कालीन पंचायत सचिव दिनेश टांडेकर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जैतखाम निर्माण संबंधी प्रस्ताव पंचायत बैठक में नियमानुसार पारित किया गया था। सचिव ने बताया कि बैठक की सूचना में सभी विषयों का उल्लेख होना आवश्यक नहीं होता और आवश्यकता अनुसार बैठक में अतिरिक्त प्रस्ताव भी लिए जा सकते हैं। उनके अनुसार प्रस्ताव में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और एसडीएम न्यायालय की आगामी सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पंचायत प्रस्ताव नियमानुसार पारित हुआ था या शिकायतकर्ताओं के आरोप सही हैं।