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खैरागढ़ में दुर्ग संभागीय शतरंज प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, बौद्धिक खेल की परंपरा को मिला नया आयाम

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जी.एच. रायसोनी मेमोरियल के तहत दुर्ग संभाग स्तरीय एक दिवसीय शतरंज प्रतियोगिता का मंगलवार को सरस्वती शिशु एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में गरिमामय शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्रीय विधायक यशोदा वर्मा के करकमलों से हुआ जबकि अध्यक्षता दुर्ग शतरंज संघ के अध्यक्ष ईश्वर सिंह ने की। आयोजन में दुर्ग संभाग के सभी सात जिलों यथा दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-चौकी, कबीरधाम (कवर्धा) तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) से विभिन्न आयु वर्ग के महिला एवं पुरुष खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का आयोजन जी.एच. रायसोनी स्पोर्ट्स एंड कल्चरल फाउंडेशन के सहयोग से जिला शतरंज संघ, केसीजी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य शतरंज संघ के तत्वावधान में किया गया। प्रतियोगिता में कुल 30,000 रुपये की पुरस्कार राशि के साथ ट्रॉफी, मेडल एवं मोमेंटो प्रदान किए गए। मुख्य 10 पुरस्कारों के अतिरिक्त विभिन्न आयु वर्ग, श्रेष्ठ महिला खिलाड़ी, श्रेष्ठ स्थानीय खिलाड़ी, दिव्यांग एवं वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिए भी विशेष श्रेणियां निर्धारित की गई।

अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि विधायक यशोदा वर्मा ने शतरंज को केवल खेल नहीं बल्कि मानसिक अनुशासन, एकाग्रता और दूरदर्शिता का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि शतरंज व्यक्ति को जीवन के हर मोड़ पर रणनीतिक सोच और संतुलित निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। विशिष्ट अतिथि नीलांबर वर्मा ने शतरंज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस खेल की उत्पत्ति प्राचीन भारत में “चतुरंग” के रूप में हुई, जो समय के साथ विश्वभर में विकसित होकर आधुनिक शतरंज बना। उन्होंने कहा कि यह खेल भारतीय बौद्धिक परंपरा का प्रतीक है और आज भी वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को सुदृढ़ करता है।

कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन कर रहे पत्रकार संघ के संरक्षक अनुराग शांति तुरे ने शतरंज के सामाजिक एवं बौद्धिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह खेल नई पीढ़ी को धैर्य, विश्लेषण क्षमता और रणनीतिक सोच विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने इसे जीवन प्रबंधन का भी प्रभावी माध्यम बताया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं खेल प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में जिला शतरंज संघ के पदाधिकारियों जिनमें अध्यक्ष सद्दाम हुसैन, उपाध्यक्ष यतेंद्रजीत सिंह, सचिव रॉकी देवांगन, कोषाध्यक्ष शेख जाहिद तथा निर्णायक मंडल के अनिल शर्मा एवं दिव्यांशु उपाध्याय सहित अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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