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20 वर्षों में 12 राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने वाले मनरेगा कर्मियों का भविष्य संकट में

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने राज्य शासन और भारत सरकार का ध्यान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए कहा है कि पिछले 20 वर्षों में कर्मचारियों की मेहनत, समर्पण और दक्षता के बल पर प्रदेश को 12 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इसके बावजूद आज मनरेगा कर्मियों का भविष्य असुरक्षित और अनिश्चित बना हुआ है। खैरागढ़ से जुड़े महासंघ का कहना है कि राज्य में प्रस्तावित वीबी-जी राम जी योजना लागू किए जाने की प्रक्रिया के बीच कर्मचारियों की वर्षों पुरानी एवं न्यायोचित मांगों नियमितीकरण, मानव संसाधन नीति के तहत सेवा सुरक्षा, सामाजिक एवं भविष्य सुरक्षा, ग्राम रोजगार सहायकों को संविदा का दर्जा तथा ग्रेड-पे निर्धारण पर अब तक कोई स्पष्ट नीति अथवा दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष और भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है।

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय क्षत्रि ने बताया कि गत दिसंबर में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष मनरेगा कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा गया था। इस दौरान सेवा सुरक्षा, मानव संसाधन नीति और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल समाधान की मांग की गई थी।

महासंघ के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा था कि नई व्यवस्थाओं में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी तथा किसी भी कर्मचारी की सेवा या रोजगार पर कोई संकट नहीं आने दिया जाएगा। साथ ही सेवा सुरक्षा के संबंध में राज्य सरकार से गंभीरता से चर्चा करने का भी भरोसा दिया गया था।

महासंघ का कहना है कि केंद्रीय स्तर पर मिले आश्वासन के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस एवं लिखित नीति जारी नहीं की गई है। इससे कर्मचारियों के बीच असमंजस और असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है।

महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही कर्मचारियों की मांगों पर स्पष्ट नीति और लिखित आदेश जारी नहीं किए गए, तो 2, 3 और 4 जुलाई 2026 तक तीन दिवसीय चरणबद्ध एवं सांकेतिक आंदोलन किया जाएगा।आंदोलन के तहत पहले दिन जनपद स्तर पर विरोध-प्रदर्शन, दूसरे दिन जिला स्तर पर रैली एवं ज्ञापन सौंपा जाएगा, जबकि तीसरे दिन प्रदेशव्यापी हड़ताल आयोजित की जाएगी। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल विरोध-प्रदर्शन नहीं, बल्कि वर्षों से मनरेगा योजना में सेवा दे रहे कर्मचारियों के सम्मान, अधिकार, सेवा सुरक्षा और भविष्य की रक्षा की निर्णायक लड़ाई है। महासंघ ने राज्य शासन से इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र ठोस निर्णय लेने की मांग की है।

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