
30 लाख का भवन तैयार लेकिन उपयोग नहीं होने से बेकार
लाइसेंस और उपकरणों की अड़चन से संचालन अधर में
गंभीर मरीजों को अब भी दूसरे शहरों पर रहना पड़ रहा निर्भर
सत्यमेव न्यूज छुईखदान। क्षेत्र के मरीजों को स्थानीय स्तर पर रक्त उपलब्ध कराने की उम्मीद एक बार फिर लंबी होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के छुईखदान में ब्लड बैंक भवन के उद्घाटन के करीब एक साल बाद भी यहां ब्लड बैंक का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। करीब 30 लाख रुपए की लागत से तैयार भवन उपयोग में नहीं आने के कारण अब अपनी उपयोगिता खोता नजर आ रहा है। वहीं गंभीर मरीजों के परिजनों को रक्त की व्यवस्था के लिए राजनांदगांव दुर्ग-भिलाई और रायपुर तक जाना पड़ रहा है। बताया गया कि 13 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के खैरागढ़ प्रवास के दौरान छुईखदान में लंबे समय से चली आ रही ब्लड बैंक की मांग को लेकर पहल हुई थी। इसके बाद भवन तैयार कर उसका उद्घाटन भी कर दिया गया है। उस समय क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि जल्द ही ब्लड बैंक की सुविधा शुरू हो जाएगी और आपात स्थिति में मरीजों को रक्त के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। लेकिन करीब एक वर्ष बीतने के बाद भी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी है।
भवन तैयार, व्यवस्था का इंतजार
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ब्लड बैंक के संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। इसके अलावा कुछ जरूरी और महंगे उपकरणों की उपलब्धता भी शेष बताई जा रही है। इन्हीं प्रक्रियाओं के कारण ब्लड बैंक का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब ब्लड बैंक के संचालन के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति और उपकरणों की व्यवस्था पूरी नहीं हुई थी तब भवन का उद्घाटन क्यों किया गया। यदि निर्माण के साथ ही लाइसेंस और उपकरणों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाती तो अब तक क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सकता था।
आपात स्थिति में बढ़ जाती है परेशानी
छुईखदान के अलावा आसपास के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के मरीज भी स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर हैं। दुर्घटना प्रसव ऑपरेशन अथवा अन्य गंभीर बीमारी के मामलों में रक्त की तत्काल जरूरत पड़ने पर मरीज के परिजनों को दूसरे शहरों की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। आपात स्थिति में दूरी और समय दोनों ही बड़ी चुनौती बन जाते हैं। स्थानीय स्तर पर ब्लड बैंक शुरू होने से छुईखदान के साथ आसपास के गांवों के मरीजों को भी राहत मिल सकती है। विशेषकर गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान समय पर रक्त उपलब्ध कराने में यह सुविधा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर कांग्रेस का सवाल
ब्लड बैंक के शुरू नहीं होने को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस जिला महामंत्री सज्जाक खान और सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों उद्घाटन के लगभग एक साल बाद भी सुविधा शुरू नहीं होना क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ठोस पहल नहीं हो रही है। उनका कहना है कि जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अब भी दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। नेताओं ने मांग की कि ब्लड बैंक के संचालन में आ रही बाधाओं को तत्काल दूर कर इसे जनता के लिए शुरू किया जाए।
उद्घाटन के बाद कब तक इंतजार?
छुईखदान में ब्लड बैंक का भवन तैयार होने के बावजूद इसका संचालन शुरू नहीं होने से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब क्षेत्रवासियों की नजर इस बात पर है कि लंबित लाइसेंस और उपकरणों की प्रक्रिया कब पूरी होगी और करीब एक साल से तैयार भवन वास्तव में मरीजों के काम कब आएगा।
