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विश्व पर्यावरण दिवस पर वन संरक्षण को लेकर उठे सवाल: 48 एकड़ भूमि में हजारों पेड़ों की कटाई का आरोप

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां देशभर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है वहीं खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम देवरी से सामने आया एक मामला पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करता दिखाई दे रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम देवरी में 48 एकड़ भूमि पर लगे हजारों पेड़ों की कथित रूप से बिना वैधानिक अनुमति कटाई किए जाने के आरोप सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले के पाटन निवासी रूपेश चंद्राकर द्वारा ग्राम देवरी में लगभग 48 एकड़ भूमि खरीदी गई है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि यह क्षेत्र वन भूमि से सटा हुआ है तथा यहां बड़ी संख्या में परिपक्व और मूल्यवान वृक्ष मौजूद हैं। आरोप है कि इन वृक्षों की कटाई राजस्व एवं वन विभाग की आवश्यक स्वीकृति के बिना कराई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक कटाई का कार्य प्रतिदिन सुबह लगभग 5 बजे से 9 बजे के बीच किया जा रहा है ताकि गतिविधियां सामान्य लोगों की निगाह से दूर रहें। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि ग्राम देवरी निवासी एक व्यक्ति के माध्यम से कटाई का कार्य संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि अब तक लगभग दो एकड़ क्षेत्र के सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं तथा लकड़ियों का व्यावसायिक उपयोग एवं विक्रय भी किया जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई का सीधा असर स्थानीय जलवायु, भू-जल स्तर, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन पर पड़ता है। वर्तमान में बढ़ती गर्मी, जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच वृक्ष संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में तापमान वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के पीछे अनियंत्रित वृक्ष कटाई भी एक प्रमुख कारण है।

मामले ने प्रशासनिक तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय से बेहद कम दूरी पर यदि इतने बड़े पैमाने पर वृक्ष कटाई की गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो संबंधित विभागों की जानकारी और निगरानी को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मुख्यालय के निकट ऐसी स्थिति है तो दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) टंकेश्वर प्रसाद साहू ने कहा है कि उन्हें शिकायत की जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी तथा जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब पर्यावरण दिवस पर सामने आए इस संवेदनशील मामले में लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पर्यावरण संरक्षण के दावों को व्यवहारिक रूप देने के लिए संबंधित विभाग कितनी तत्परता और गंभीरता से कदम उठाते हैं।

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