छत्तीसगढ़

डोंगरगढ़–कवर्धा–कटघोरा रेल लाइन: छह साल बाद भी धीमी रफ्तार

सत्यमेव न्यूज छुईखदान। बहुप्रतीक्षित डोंगरगढ़–कवर्धा–कटघोरा नई रेल लाइन परियोजना की रफ्तार को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। लगभग छह वर्ष पहले स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है जिससे क्षेत्रवासियों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि परियोजना की घोषणा के बाद रेल लाइन से विकास और बेहतर आवागमन की उम्मीदें जगी थी लेकिन अब तक अधिकांश कार्य कागजी प्रक्रिया और प्रारंभिक सर्वे तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर जमीन अधिग्रहण और प्रारंभिक औपचारिकताओं से आगे काम नहीं बढ़ पाया है जबकि लोगों को उम्मीद थी कि इस अवधि में निर्माण कार्य काफी आगे बढ़ चुका होगा। इस रेल लाइन के निर्माण से डोंगरगढ़, छुईखदान, कवर्धा सहित आसपास के कई क्षेत्रों को सीधा रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। परियोजना पूरी होने पर किसानों को अपने कृषि उत्पाद दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी वहीं छात्रों और यात्रियों को भी आवागमन का बेहतर साधन उपलब्ध होगा। इसके अलावा धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र डोंगरगढ़ में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही थी जिससे स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती थी हालांकि वर्षों बीत जाने के बाद भी कार्य की धीमी प्रगति को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता और विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण परियोजना की गति प्रभावित हो रही है। क्षेत्रवासियों ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण परियोजना को प्राथमिकता देते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और समय-समय पर प्रगति की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि डोंगरगढ़–कवर्धा–कटघोरा रेल लाइन केवल परिवहन की सुविधा नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई उम्मीद है। ऐसे में इसे जल्द धरातल पर उतारना जनहित में आवश्यक है।

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