
बारिश की कमी से बढ़ी किसानों की चिंता
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। खरीफ सीजन के शुरुआती दौर में खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले के किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं बीज की समय पर उपलब्धता नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका प्रमुख कारण खाद एवं बीज के परिवहन में हुई देरी रही जिसके चलते कई समितियों तक आवश्यक सामग्री समय पर नहीं पहुंच सकी हालांकि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और वैकल्पिक व्यवस्था के बाद वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो गई है लेकिन अब किसानों के सामने मानसून की सुस्ती नई चुनौती बनकर उभरी है। ज्ञात हो कि जिले में पहले 39 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां संचालित थीं। इसके बाद राज्य शासन द्वारा 26 नई समितियों के गठन के साथ वर्तमान में कुल 65 समितियों के माध्यम से किसानों को शासन द्वारा निर्धारित दरों पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। समितियों का विस्तार किसानों की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया लेकिन परिवहन व्यवस्था की धीमी गति के कारण शुरुआती चरण में कई समितियों तक डीएपी सहित अन्य उर्वरकों की आपूर्ति समय पर नहीं हो सकी। विशेष रूप से डीएपी खाद की सीमित उपलब्धता को लेकर किसानों में असंतोष देखा गया। लगभग पखवाड़े भर पहले जिला मुख्यालय खैरागढ़ स्थित कलेक्ट्रेट परिसर के सामने जिला किसान संघ ने प्रदर्शन कर खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई थी। किसानों के इस आंदोलन को समर्थन देने खैरागढ़ विधायक श्रीमती यशोदा नीलांबर वर्मा भी प्रदर्शन में शामिल हुईं और कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रावल से किसानों के हित में समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने की मांग की। जिले में खाद की कमी का लाभ उठाकर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा कालाबाजारी और अवैध कारोबार की कोशिशें भी सामने आयी। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने लगातार निगरानी और कार्रवाई की। इसी क्रम में दो दिन पूर्व जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम पांडुका में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 202 बोरी संदिग्ध/नकली डीएपी खाद जब्त की। इस कार्रवाई को किसानों के हितों की सुरक्षा तथा अवैध खाद कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यद्यपि वर्तमान में जिले के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में खाद एवं बीज की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हुई है फिर भी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मांग के अनुरूप आपूर्ति पूरी तरह संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। किसानों का कहना है कि खरीफ की बुवाई के लिए जिस समय उर्वरकों की आवश्यकता थी उस दौरान पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पाने से खेती का कार्य प्रभावित हुआ। इस बीच जिला प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाए। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रावल के निर्देशन में सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खाद की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास किए गए। डीएपी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के रूप में एनपीके, 12-32-16 तथा 20-20-16 जैसे मिश्रित उर्वरक उपलब्ध कराए गए ताकि खेती का कार्य बाधित न हो। सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं केसीजी आर.के. झा ने बताया कि वर्तमान में जिले में किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता को लेकर कोई गंभीर समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि परिवहन की गति धीमी रहने के कारण कुछ स्थानों पर खाद समय पर नहीं पहुंच पाई थी लेकिन इसे किल्लत की स्थिति नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को आवश्यक उर्वरकों और बीज की उपलब्धता लगातार सुनिश्चित की जा रही है। गौरतलब है कि खाद एवं बीज की शुरुआती समस्या से उबरते ही अब किसानों की चिंता का केंद्र मानसून बन गया है। जिले में अब तक औसत से कम वर्षा दर्ज होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीघ्र पर्याप्त वर्षा नहीं होती तो बुवाई का रकबा और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि खरीफ सीजन में खाद, बीज और समय पर वर्षा तीनों की उपलब्धता समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में भविष्य में परिवहन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने, उर्वरकों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी और नकली उर्वरकों पर कड़ी निगरानी बनाए रखने की आवश्यकता है ताकि किसानों को सीजन के महत्वपूर्ण समय में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
