
टेकापार में रात के समय कथित विस्फोट से ग्रामीणों में दहशत
प्रशासन ने ब्लास्टिंग अनुमति देने से किया इनकार
कंपनी का दावा- अनुमति लेकर किया गया कार्य
एसडीएम व पंचायत ने कहा- नहीं दी गई कोई स्वीकृति
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले के ग्राम पंचायत कलकसा के आश्रित ग्राम टेकापार में अडानी कंपनी के विद्युत ट्रांसमिशन टॉवर निर्माण के दौरान रात में कथित रूप से की गई ब्लास्टिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रिहायशी क्षेत्र के समीप बिना पूर्व सूचना और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के विस्फोट किए गए जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया वहीं प्रशासन ने इस ब्लास्टिंग के लिए किसी प्रकार की अनुमति जारी किए जाने से साफ इनकार किया है जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीणों ने बताया कि 11 जुलाई की शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच किसान परसराम वर्मा एवं संतराम यादव के खेत में ट्रांसमिशन टॉवर की नींव के लिए चट्टानी जमीन तोड़ने के उद्देश्य से दो बार ब्लास्टिंग की गई। विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के घरों में कंपन महसूस हुआ और लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो उन्हें पहले से कोई सूचना दी गई और न ही सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि आबादी से लगे क्षेत्र में रात के समय इस तरह की ब्लास्टिंग लोगों की जान-माल की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। उनका आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने स्थानीय लोगों की सुरक्षा और नियमों की अनदेखी करते हुए कार्य किया। इधर निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी के प्रबंधक अविनाश कुमार का कहना है कि ब्लास्टिंग से पूर्व प्रशासन को सूचना देकर आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी और नियमानुसार ही कार्य किया गया।
हालांकि कंपनी के इस दावे का अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) टंकेश्वर प्रसाद साहू ने खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय से इस प्रकार की किसी ब्लास्टिंग की अनुमति जारी नहीं की गई है वहीं ग्राम पंचायत कलकसा की सरपंच प्रीति देवी राजपूत ने भी कहा कि पंचायत से न तो कोई अनुमति मांगी गई और न ही इस संबंध में कोई जानकारी दी गई।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि प्रशासन और पंचायत दोनों ही अनुमति देने से इनकार कर रहे हैं तो फिर अडानी कंपनी के विद्युत ट्रांसमिशन टॉवर निर्माण के दौरान ब्लास्टिंग आखिर किस आधार पर की गई। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि बिना अनुमति आबादी के समीप विस्फोट किए गए हैं तो यह गंभीर लापरवाही है और इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब पूरे मामले पर लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं यदि अनुमति के बिना ब्लास्टिंग हुई है तो यह केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण एजेंसी ने सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया था या नहीं।
