काले बंदरों के संरक्षण पर विशेष शोध के लिए शिक्षक उपेंद्र वर्मा को मिली पीएचडी की उपाधि

पांच साल के गहन अध्ययन के बाद मिली उपाधि
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने और जैव विविधता संरक्षण में उपयोगी होगा शोध
खैरागढ़। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के अंतर्गत शासकीय कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, दुर्ग के शोध केंद्र से शिक्षक उपेंद्र कुमार वर्मा को पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने जंतु विज्ञान विषय के अंतर्गत हनुमान लंगूरों (काले बंदरों) की पारिस्थितिकी और सामाजिक व्यवहार पर गहन शोध किया है। छत्तीसगढ़ में इस विषय पर शोध करने वाले वे पहले और एकमात्र शोधार्थी बताए जा रहे हैं। उपेंद्र कुमार वर्मा वर्तमान में खैरागढ़ विकासखंड के मिडिल स्कूल रेंगाकठेरा में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उनका शोध कार्य शासकीय कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, दुर्ग के प्राध्यापक डॉ.संजू सिन्हा के निर्देशन में लगभग पांच वर्षों में पूरा हुआ। शोध के दौरान मानव आबादी और उससे लगे वन क्षेत्रों में काले बंदरों की जीवनचर्या, गतिविधियों, पारिस्थितिक परिस्थितियों तथा सामाजिक व्यवहार का गहन अध्ययन किया गया।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में साबित होगा अहम शोध
हनुमान लंगूरों की पारिस्थितिकी और सामाजिक व्यवहार से संबंधित यह शोध वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके निष्कर्ष काले बंदरों के प्राकृतिक आवास, व्यवहार और पर्यावरण के साथ उनके संबंधों को समझने में सहायक हो सकते हैं साथ ही वन्यजीवों और मानव आबादी के बीच बढ़ते टकराव को रोकने तथा जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी यह अध्ययन उपयोगी साबित हो सकता है।शोध कार्य के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों के विस्तृत अध्ययन के साथ शोध पत्रों के मूल्यांकन और निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद उपेंद्र वर्मा को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
उपलब्धि पर शुभकामनाओं का लगा तांता
उपेंद्र कुमार वर्मा की इस शैक्षणिक उपलब्धि पर उनके परिवारजनों, मित्रों, शुभचिंतकों और विद्यालय के समस्त स्टाफ ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। शोध कार्य से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि यह अध्ययन छत्तीसगढ़ में काले बंदरों के संरक्षण, उनके व्यवहार की वैज्ञानिक समझ विकसित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

