
माताओं ने संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा व्रत, बाजारों में भी रही विशेष चहल-पहल
सत्यमेव न्यूज गंडईपंडरिया। नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व हलषष्ठी (हलछट्टी) श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। संतान की दीर्घायु उत्तम स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना को लेकर महिलाओं ने पूरे दिन निष्ठापूर्वक व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पर्व को लेकर सुबह से ही घरों में धार्मिक माहौल रहा। महिलाओं ने पूजा स्थल पर महुआ पलाश और बड़ की शाखाएं स्थापित कर पाड़ा का प्रतीकात्मक स्वरूप तैयार किया। पूजा के दौरान टोकरियों में महुआ के पत्ते सींक तथा विभिन्न प्रकार के फल रखकर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने हल से जोती गई भूमि में उत्पन्न अनाज का सेवन नहीं किया। पूजा के बाद पसहर चावल महुआ तथा भैंस के दूध-दही सहित पारंपरिक सामग्री का सेवन कर व्रत का पारण किया गया।

पर्व से पहले बाजारों में बढ़ी रौनक
हलषष्ठी पर्व को लेकर एक दिन पहले से ही नगर के बाजारों में खासा उत्साह देखने को मिला। पूजा में उपयोग होने वाली बांस की नई टोकरियां, खिलौने, बच्चों के कड़े, महुआ, पसहर चावल और विभिन्न मौसमी फलों की मांग बढ़ गई। सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रही। इससे स्थानीय बाजारों में भी विशेष चहल-पहल देखने को मिली।
लोक परंपरा और प्रकृति संरक्षण का संदेश
हलषष्ठी पर्व भारतीय लोक संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस व्रत में हल और बैल से जुड़ी कृषि उपज का त्याग कर प्रकृति तथा कृषि परंपराओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की मान्यता है। महिलाओं ने पूजा-अर्चना के बाद हलषष्ठी की कथा का श्रवण किया और अपनी संतानों के उज्ज्वल भविष्य आरोग्यता एवं दीर्घायु की कामना की। पर्व के चलते नगर और आसपास का वातावरण दिनभर भक्तिमय बना रहा।
