
विचारपुर धान खरीदी केंद्र में घूसखोरी विवा
वीडियो, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और आरोपों के बावजूद कार्रवाई नहीं
दबावपूर्ण समझौते के बाद जांच पर उठे सवाल
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। विचारपुर स्थित धान खरीदी केंद्र में कथित अवैध वसूली के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जिस प्रकरण में किसान परिवार ने वीडियो सहित शिकायत दर्ज कर खरीदी केंद्र प्रबंधन पर पैसों की मांग का आरोप लगाया था अब दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि शिकायत वापस लेने के बावजूद पूरे मामले ने खरीदी व्यवस्था और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब मामले में वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और शिकायत जैसे तथ्य मौजूद थे। तब जांच आखिर किस निष्कर्ष तक पहुंची और अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शिकायतकर्ता परिवार पर समझौते का दबाव?
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता परिवार पर लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि विभिन्न माध्यमों से परिवार से संपर्क कर शिकायत वापस लेने के लिए मनाने की कोशिशें की गई हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है। लेकिन इधर शिकायतकर्ता पक्ष ने मामले पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन गई है साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनने का आश्वासन मिलने के बाद शिकायत वापस लेने का निर्णय लिया गया।
वीडियो और ट्रांजेक्शन के बाद भी जांच ठंडी क्यों?
जानकारी के मुताबिक वीडियो बनाने वाले तुलेश सिन्हा स्वयं किसान नहीं बल्कि किसान परिवार के दामाद हैं जो धान बिक्री प्रक्रिया में सहयोग के लिए खरीदी केंद्र पहुंचे थे। आरोप था कि धान खरीदी के दौरान कथित रूप से पैसों की मांग की गई, जिसके बाद उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड किया था। हालांकि बाद में दिए गए कथन में यह स्वीकार किया गया कि वीडियो उन्होंने जानबूझकर बनाया था जिसके बाद जांच की दिशा बदलती नजर आई। इसके बावजूद कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वीडियो में कथित लेन-देन की बातचीत, बारकोड के माध्यम से भुगतान और फोनपे से राशि ट्रांसफर होने जैसे तथ्य सामने आए थे, तो क्या केवल शिकायत वापस लेने से पूरा मामला समाप्त माना जा सकता है?
छोटे किसान आ जाते दबाव में और समझौते को हो जाते है मजबूर?
ग्रामीणों का कहना है कि खरीदी केंद्रों से जुड़े विवादों में अक्सर छोटे किसान दबाव में समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं। उन्हें आगामी सीजन में धान खरीदी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर आशंकाएं बनी रहती हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या हर बार शिकायतकर्ता को ही पीछे हटना पड़ता है और शिकायत वापस होते ही मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं? फिलहाल शिकायत भले वापस ले ली गई हो लेकिन विचारपुर धान खरीदी केंद्र का यह मामला अब केवल एक विवाद नहीं बल्कि पूरे खरीदी तंत्र, जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न बनकर उभर रहा है।