
समाजसेवा, पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नई दिल्ली में हुआ सम्मान
छुईखदान। अविभाजित राजनांदगांव जिले की तीन प्रमुख हस्तियों बर्फानी सेवाश्रम समिति के अध्यक्ष एवं समाजसेवी राजेश मारू, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक बीरेंद्र बहादुर सिंह तथा वरिष्ठ पत्रकार कमलेश सिमनकर को द लुसियाना रिसर्च यूनिवर्सिटी की ओर से डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के द महफिल ग्रैंड में 4 अक्टूबर को आयोजित गरिमामय समारोह में विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि संस्था एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड फाउंडेशन ने तीनों को उनके संबंधित क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया। राजेश मारू पिछले चार दशकों से धर्म, अध्यात्म और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मां पाताल भैरवी मंदिर के निर्माण काल से जुड़े मारू नवरात्रि, महाशिवरात्रि और शरद पूर्णिमा के अवसर पर विभिन्न सेवा गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं। शरद पूर्णिमा पर पिछले 30 वर्षों से दमा पीड़ितों को औषधीय खीर का नि:शुल्क वितरण तथा वनांचल क्षेत्रों में जरूरतमंदों की सहायता उनकी प्रमुख सेवा गतिविधियों में शामिल है। कोरोना काल में भी उन्होंने व्यापक स्तर पर जरूरतमंदों की मदद की। वे मितान छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार कल्याण संघ एवं बैगा ग्रुप से भी जुड़े हैं और छत्तीसगढ़ी लोककला एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करते रहे हैं। बीरेंद्र बहादुर सिंह पिछले 32 वर्षों से पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2020 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘छुईखदान परत दर परत’ को पाठकों ने सराहा। समसामयिक विषयों पर उनके अनेक लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। पत्रकारिता और लेखन के साथ वे कार्यक्रम संयोजन एवं उद्घोषणा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार कमलेश सिमनकर की पहचान खोजी पत्रकार के रूप में है। पिछले 15 वर्षों से उन्होंने नक्सल प्रभावित और पहुंचविहीन वनांचल क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है। उनके प्रयासों से सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए शासन-प्रशासन का ध्यान कई बार आकृष्ट हुआ। वनांचल में स्वास्थ्य शिविर, आंगनबाड़ी केंद्र, सोलर बिजली, बोरवेल तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी उन्होंने पहल की। कोरोना काल में दवाइयां, राशन एवं अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने के साथ जरूरतमंदों को उनके घरों तक पहुंचाने और करीब 17 शवों के अंतिम संस्कार में सहयोग करने का कार्य भी किया। तीनों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिलने पर उनके मित्रों, शुभचिंतकों और परिचितों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
