बिना कार्य भुगतान पर हुई कार्रवाई: खैरागढ़ नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ समेत तीन अधिकारी निलंबित

प्रारंभिक जांच में बिना माप पुस्तिका प्रविष्टि और अधूरे कार्यों का भुगतान उजागर
विभाग ने तीन माह की जांच के बाद की कार्रवाई
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। नगर पालिका परिषद खैरागढ़ में अधोसंरचना मद के तहत कराए गए विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अविनाश देवांगन, उप अभियंता मुजफ्फर हुसैन तथा लेखापाल नीरज सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तीनों अधिकारियों को निलंबन अवधि के दौरान क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग से संबद्ध किया गया है। विभाग की प्रारंभिक जांच में बिना कार्य पूर्ण कराए तथा आवश्यक अभिलेखीय प्रक्रिया का पालन किए बिना भुगतान किए जाने के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने पर यह कार्रवाई की गई।
संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा जारी आदेश के अनुसार अधोसंरचना मद से स्वीकृत बरेठपारा क्षेत्र के नाली निर्माण कार्य में माप पुस्तिका (एमबी) में प्रविष्टि दर्ज किए बिना भुगतान किया गया वहीं सीसी सड़क का निर्माण पूर्ण होने से पहले ही संबंधित एजेंसी को राशि जारी कर दी गई। प्रारंभिक जांच में इन मामलों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने के बाद विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की गई है।
नगर पालिका अध्यक्ष ने की थी मामले की शिकायत
ज्ञात हो कि मामले की शुरुआत नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा चंद्राकर द्वारा 23 अप्रैल को की गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में बरेठपारा वार्ड में सीसी सड़क का निर्माण कराए बिना ही ठेकेदार को भुगतान किए जाने का आरोप लगाते हुए विभागीय जांच की मांग की गई थी। शिकायत प्राप्त होने के बाद विभागीय टीम ने स्थल निरीक्षण कर वार्ड पार्षद एवं स्थानीय नागरिकों के बयान दर्ज किए। लगभग तीन माह तक चली जांच के उपरांत विभाग ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। बता दे कि जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अधोसंरचना मद के अंतर्गत नगर के विभिन्न वार्डों में सीसी सड़क, नाली, हाईमास्ट लाइट तथा मिनी उद्यान जैसे विकास कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया के माध्यम से एजेंसियों का चयन किया गया था। इसी क्रम में वार्ड क्रमांक-4 में स्वीकृत सीसी सड़क का निर्माण निर्धारित स्थल के बजाय अन्य स्थान पर किए जाने तथा उसके बावजूद भुगतान जारी होने जैसे मामलों की भी जांच में समीक्षा की गई है।
भ्रष्टाचार को लेकर बीते ढाई वर्षों से लगातार हो रही कार्रवाई, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल
ज्ञात हो कि नगर पालिका परिषद खैरागढ़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक विवादों के मामलों में लगातार विभागीय कार्रवाई होती रही है। विभिन्न मामलों में अब तक चार से अधिक मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (सीएमओ), एक उप अभियंता, एक लेखापाल तथा एक राजस्व निरीक्षक (आरआई) पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। गौरतलब है कि जिम सामग्री खरीदी, निर्माण कार्यों, दवा खरीदी, दुकान नीलामी तथा अन्य वित्तीय मामलों को लेकर भी पूर्व में विभागीय जांच और कार्रवाई हो चुकी है वहीं अब ताजा निलंबन ने एक बार फिर नगर पालिका की वित्तीय व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिये हैं। सूत्रों के अनुसार अधोसंरचना मद के तहत करोड़ों रुपये की राशि से विभिन्न विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे लेकिन कई कार्यों के निष्पादन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। स्टेशनरी, सफाई सामग्री, फिटकरी, ई-रिक्शा सहित अन्य खरीदी प्रक्रियाओं को लेकर भी समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं। नगर पालिका के कर्मचारियों का मानना है कि लगातार हो रही विभागीय कार्रवाइयों से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। मामले में अब ताजा कार्रवाई यह संकेत देती है कि स्थानीय निकायों में सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तथा भुगतान प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।