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बार-बार हो रहे करंट हादसे से उठ रहे सवाल, कुंभकरणीय नींद में विद्युत् विभाग

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले में लगातार सामने आ रहे विद्युत हादसों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग समय पर सुधार कार्य नहीं करता जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। ताजा मामला गाड़ाघाट-पांडादाह मार्ग स्थित एक खेत का है जहां लंबे समय से खेत में गिरे बिजली तार की चपेट में आने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई जबकि दो अन्य मजदूर घायल हो गए। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और विभाग की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

जानकारी अनुसार पिपलाकछार निवासी धनसाय पटेल खेत में कार्य कर रहे थे तभी गिरे हुए बिजली तार की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो अन्य मजदूर घायल हो गए। धनसाय मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। वे अपनी बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के साथ ही दिव्यांग पत्नी की देखभाल भी कर रहे थे। उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक खेत मालिक चेतनदास साहू ने 19 मई को पांडादाह विद्युत सब डिवीजन कार्यालय में खेत में गिरे तार की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत विभागीय रजिस्टर में दर्ज होने के बावजूद मई और जून माह तक कोई सुधार कार्य नहीं किया गया। बाद में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई लेकिन वहां से निर्देश मिलने के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तार हटाया जाता या लाइन दुरुस्त कर दी जाती तो यह हादसा टल सकता था। पहले भी हो चुके हैं कई जानलेवा हादसे
यह पहला मामला नहीं है।

इससे पहले भी टोलागांव में पेड़ कटाई के दौरान बिजली लाइन बंद नहीं किए जाने से पेंड्रीकला निवासी ठेका श्रमिक हेमंत साहू (45) की करंट लगने से मौत हो चुकी है वहीं खैरागढ़ शहर में एलटी लाइन चालू रहने के दौरान पोल पर चढ़ाए गए एक ठेका श्रमिक के हादसे में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध पुलिस ने प्रकरण भी दर्ज किया था। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद विभागीय व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

घटना से नाराज ग्रामीणों ने पांडादाह स्थित बिजली विभाग के सब डिवीजन कार्यालय का घेराव कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है लेकिन अब तक कोई सार्थक कार्रवाई सामने नहीं आयी है। ग्रामीणों का आरोप था कि हादसे की सूचना मिलने के बाद नियम विपरीत अधिकारी कार्यालय में ताला लगाकर चले गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एसडीएम टंकेश्वर प्रसाद साहू, नायब तहसीलदार भूपेंद्र नेताम तथा थाना प्रभारी अनिल शर्मा मौके पर पहुंचे थे तब जाकर कहीं स्थिति संभाल पाई थी। अधिकारियों के निर्देश पर विभाग के सहायक अभियंता (एई) उत्तम साहू और कनिष्ठ अभियंता (जेई) अतुल सिंह गहरवार भी कार्यालय पहुंचे जहां ग्रामीणों ने उनसे जवाब-तलब किया। पुलिस ने दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन ने ग्रामीणों से ज्ञापन लेकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

ग्रामीणों ने विभाग के कुछ कर्मचारियों पर नए बिजली कनेक्शन, मरम्मत और अन्य तकनीकी कार्यों के नाम पर अवैध वसूली के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि बिना सुविधा शुल्क के कार्यों में अनावश्यक विलंब किया जाता है। खेत मालिक चेतनदास साहू ने आरोप लगाया कि गिरे हुए तार को हटाने के लिए संबंधित कर्मचारियों द्वारा पैसों की मांग की गई थी। हालांकि इन आरोपों की विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

लगातार हो रहे विद्युत हादसों ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी यदि विभाग समय पर कार्रवाई नहीं करेगा तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि नियमित रखरखाव, शिकायतों का समयबद्ध निराकरण और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन ही ऐसे हादसों को रोक सकता है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में जिम्मेदारी किस पर तय होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग कौन से ठोस कदम उठाता है।

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