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खैरागढ़ विश्वविद्यालय ने केशला में लगाया साहित्यिक शिविर

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा ग्राम केशला में लोक जागरण और अभिव्यक्ति कौशल विषय पर एक दिवसीय साहित्यिक शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो.डॉ. लवली शर्मा मुख्य अतिथि रहीं। अध्यक्षता कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो.डॉ. राजन यादव ने की। विषय विशेषज्ञ के रूप में अशोक ओसवाल उपस्थित रहे। अपने संबोधन में कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराएं अत्यंत समृद्ध हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में आयोजित ग्रीष्मकालीन कार्यशालाओं की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को संगीत एवं कला शिक्षा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। अपने उद्बोधन का समापन उन्होंने फाग गीत प्रस्तुत कर किया। अशोक ओसवाल ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने की सलाह दी। प्रो. राजन यादव ने बताया कि खैरागढ़ क्षेत्र के 200 से अधिक गांवों में से केशला का चयन विशेष रूप से इस साहित्यिक शिविर के लिए किया गया है। उन्होंने ग्रामीणों से बच्चों को विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाकर कला एवं संगीत शिक्षा का लाभ लेने की अपील की। कार्यक्रम में हिन्दी विभाग एवं लोक संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने गणेश वंदना, नाचा, गेड़ी, राऊत नाच, जस–जवारा तथा फाग गीत की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं जिन्हें ग्रामीणों ने सराहा।

शिविर के दौरान विद्यार्थियों ने समूह बनाकर लगभग 70 से 80 घरों तक पहुंचकर सर्वे किया। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने शासकीय योजनाओं की जानकारी लेने तथा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों से ग्रामीणों को अवगत कराने का प्रयास किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत समस्याएं भी साझा कीं जिन पर पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन समीरचंद साहू ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ. देवमाईत मिंज ने किया जबकि ग्रामीणों की ओर से आशीष पारख ने विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। आयोजन में पूर्व जिला पंचायत सदस्य टीकम वर्मा, जनपद सदस्य लक्ष्मी वर्मा, बाबूलाल गौटिया, पूरनलाल गौटिया, आशीष पारख, सचिव दीनबंधु साहू, जगत राम दिवान, रोजगार सचिव अश्वन वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से अतिथि व्याख्याता डॉ. कुमुद मिश्र, हिंदी साहित्य परिषद की अध्यक्ष दीपांशी मेश्राम, सचिव समीरचंद साहू, एकलव्य भारती, इंदु यादव, मानसी रजक, शोधार्थी रामेश्वरी एवं कृष्णा नेताम का विशेष योगदान रहा।

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