सरकारी शराब दुकानों के बाहर मारपीट के वीडियो वायरल, प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी पर उठ रहे सवाल

खैरागढ़। जिले में सरकारी शराब दुकानों के संचालन और उनके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। खैरागढ़ और छुईखदान की शराब दुकानों से जुड़े दो वीडियो सामने आए हैं। इनमें युवकों के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है। एक मामले में पर्स चोरी के संदेह में युवक की पिटाई किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इन घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पायेगी लेकिन पर्स चोरी का संदेह होने पर कानून के अनुसार पुलिस को सूचना देकर जांच कराना चाहिए था। किसी व्यक्ति को केवल शक के आधार पर दोषी मानकर उसके साथ मारपीट करना कानून हाथ में लेना ही है। ज्ञात हो कि शराब दुकानों के आसपास इस तरह की घटनाएं कई तरह के सवाल खड़े कर रही हैं।
पहले भी विवादों में रही हैं शराब दुकानें
जिले में शराब दुकानों को लेकर मारपीट, निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने (ओवररेटिंग) और कथित नकली शराब की बिक्री जैसे मामले पहले भी चर्चा में रहे हैं। इन मामलों में संबंधित आबकारी अधिकारियों पर कार्रवाई और निलंबन भी हुआ। इसके बाद सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए गए थे। अब नए वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि पहले की घटनाओं से विभाग ने क्या सबक लिया और व्यवस्था में सुधार के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए गए। बहरहाल सरकारी शराब दुकानों के संचालन और नियमों के पालन की निगरानी आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में दुकानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था, नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है वहीं पुलिस की नियमित गश्त और विवाद की स्थिति में त्वरित कार्रवाई भी जरूरी है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील स्थानों पर निगरानी के पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं।
वीडियो के आधार पर जांच करेगी पुलिस
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रूपेश कुमार डांडे ने बताया कि मामले में अब तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। वायरल वीडियो की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने कहा कि वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जाएगी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इन घटनाओं ने सरकारी शराब दुकानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस तथा आबकारी विभाग क्या ठोस कदम उठाते हैं।
