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विभा देवव्रत सिंह ने तहसीलदार के समक्ष पेश किए दस्तावेज, पदमा सिंह नहीं पहुंची, अपने वकील को भेजा

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया उस समय विवादों के केंद्र में आ गई जब मतदाता सूची में पूर्व विधायक एवं सांसद रहे स्व.देवव्रत सिंह की वैवाहिक स्थिति से जुड़ी गंभीर त्रुटि सामने आई। इस मामले ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है बल्कि चुनावी दस्तावेजों की विश्वसनीयता और सत्यापन प्रक्रिया पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब उजागर हुआ जब रानी विभा देवव्रत सिंह ने आरोप लगाया कि SIR टीम एवं संबंधित बीएलओ की लापरवाही के चलते पद्मा पंत जो राजा देवव्रत सिंह की पूर्व और तलाकशुदा पत्नी हैं और वर्तमान में नितिन पंत नामक व्यक्ति की पत्नी हैं। रानी विभा सिंह के इस आरोप ने न केवल राजनीतिक खेमे में बल्कि राज परिवार में भी खलबली मचा दी। विभा सिंह ने बताया कि उनका नाम आज भी उदयपुर मतदान केंद्र क्रमांक 177 की मतदाता सूची में दिवंगत देवव्रत सिंह की पत्नी के रूप में दर्ज है। यह त्रुटि न केवल सामाजिक दृष्टि से आपत्तिजनक है बल्कि कानूनन भी गंभीर परिणाम उत्पन्न करने वाली है। आप और इस मामले में पूर्व प्रकाशित खबरों के बाद प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन हरकत में आया और उसके बाद रानी विभा देवव्रत सिंह द्वारा तहसील कार्यालय छुईखदान में विधिवत याचिका प्रस्तुत की गई थी। याचिका पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने दोनों पक्षों पद्मा देवी सिंह और विभा देवव्रत सिंह को विधिक नोटिस जारी कर 14 जनवरी 2026 को समस्त दस्तावेजों के साथ तहसील कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। निर्धारित तिथि पर रानी विभा देवव्रत सिंह स्वयं तहसील कार्यालय पहुंचीं और अपने विवाह से संबंधित वैधानिक दस्तावेजों के साथ-साथ पद्मा देवी पंत एवं देवव्रत सिंह के मध्य हुए तलाक के प्रमाण-पत्र तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि पद्मा देवी पंत का उनके पति स्व. देवव्रत सिंह से पूर्व में ही विधिवत तलाक हो चुका है तथा वह वर्तमान में उदयपुर की निवासी भी नहीं हैं इसके बावजूद कथित रूप से गलत जानकारी देकर उन्होंने स्वयं को उदयपुर निवासी दर्शाते हुए SIR सूची में नाम दर्ज कराया।

मामले में प्रशासन द्वारा नोटिस के बावजूद पद्मा देवी पंत स्वयं तहसील कार्यालय में उपस्थित नहीं हुई लेकिन उनकी ओर से अधिवक्ता सुप्रीत सिंह तहसील कोर्ट में पदमा सिंह का पक्ष लेकर पहुंचे थे जिसे लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

रानी विभा देवव्रत सिंह ने SIR प्रक्रिया के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि गलत जानकारी देने वाले मतदाता के विरुद्ध एक वर्ष तक की सजा एवं आर्थिक दंड का स्पष्ट प्रावधान है। उन्होंने मांग की कि नियमों के तहत पद्मा पंत के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए साथ ही उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई नहीं की तो वे इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय ( बिलासपुर हाई कोर्ट) का रुख करेंगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्रस्तुत दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और परीक्षण के उपरांत आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान प्रशासन की ओर से जारी नहीं किया गया है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिले में SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता, फील्ड सत्यापन की वास्तविकता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई है।

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