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खैरागढ़ की कुछ गणेश विसर्जन झांकियों पर उठ रहे सवाल

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इस वर्ष गणेश विसर्जन के दौरान नगर में निकली झांकियों ने धार्मिक आस्था से ज्यादा दिखावे और मौज-मस्ती का रूप ले लिया। रविवार देर रात से सोमवार सुबह तक झांकियों का सिलसिला जारी रहा। कुछ ही समितियों ने परंपरागत धार्मिक झलक प्रस्तुत की जबकि अधिकतर जगहों पर सिर्फ डीजे और नशे में धुत युवाओं की भीड़ थिरकती नजर आयी। इसमें सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि पूर्व के वर्षों में युवा शराब पीकर विसर्जन झांकियों आपत्तिजनक अश्लील गाने चलाकर भौड़ा नाच करते थे लेकिन अब इस साल के विसर्जन के दौरान नजारे में कुछ समितियों के डीजे झांकी में युवतियाँ भी नशे में थिरकती नजर आयी जो की संगीत नगरी खैरागढ़ की सभ्य और सभ्रांत परंपरा के बीच बेहद आपत्तिजनक है।

इस वर्ष की विसर्जन झांकियों के आयोजन को लेकर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताई है कि देवी-देवताओं की झांकियों में अश्लील गानों और हुड़दंग का प्रदर्शन परंपराओं का सीधा अपमान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद देव प्रतिमाओं की झांकी या विसर्जन यात्रा उचित नहीं है बावजूद इसके नगर में पूरी रात झांकियां चलती रहीं और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। बता दे कि नवीन जिला निर्माण के बाद बीते तीन वर्षों से राजनांदगांव की तर्ज पर खैरागढ़ में विसर्जन झांकियों की परंपरा शुरू की गई है। रात में झांकियों के निकलने के बाद हर साल विवाद और अपराध बढ़ता जा रहा है जिसके कारण आम नागरिकों के अलावा पुलिस और प्रशासन की भी मुश्किलें बढ़ गई है।

ज्ञात हो कि इसी बीच सोमवार सुबह विसर्जन जुलूस के दौरान हुई युवक की चाकूबाजी से हत्या ने माहौल और अधिक गंभीर कर दिया। नागरिकों का कहना है कि आस्था के नाम पर निकलने वाले ये जुलूस अब हिंसक और बेकाबू होते जा रहे हैं जिनमें श्रद्धा कम और जोखिम ज्यादा बढ़ गया है। अगर समय रहते धार्मिक परंपराओं को संस्कृति के अनुरूप नहीं रखा गया और इसी तरह से आधुनिकता की आड़ में नशे की प्रवृत्ति और अपराध बढ़ते गए तो आने वाले समय में कोई भी अपराध का शिकार हो सकता हैतथा कौन सुरक्षित रहेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है।

विसर्जन झांकियों के बाद बढ़ते अपराध और विकृत होती परंपराओं को लेकर आक्रोशित नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आगामी वर्षों में सख्त नियम लागू किए जाये। मूर्ति विसर्जन का समय केवल सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक तय हो। डीजे और अश्लील गानों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया जाए। सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त को और मजबूत किया जाए। संगीत नगरी खैरागढ़ में जो कि अब जिला मुख्यालय भी है धार्मिक आयोजनों की गरिमा और परंपरा बनाए रखने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्धारित समय और मर्यादित ध्वनि सीमा लागू करने से न केवल धार्मिक आस्था की रक्षा होगी बल्कि अशोभनीय घटनाओं और अपराध की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।

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