
बैंक, नगर पालिका, विद्युत विभाग और बीएसएनएल के प्रतिनिधियों ने लिया अधिकाधिक मामलों के निराकरण का संकल्प
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने के उद्देश्य से 7 सितंबर को व्यवहार न्यायालय खैरागढ़ में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ की अध्यक्ष मोहनी कंवर ने की। बैठक में बैंक नगर पालिका बीएसएनएल और विद्युत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव के निर्देशानुसार आयोजित बैठक में नेशनल लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक प्रकरणों का आपसी सहमति एवं राजीनामे के आधार पर निराकरण किए जाने पर चर्चा हुई। उपस्थित विभागीय प्रतिनिधियों ने प्री-लिटिगेशन तथा लंबित प्रकरणों के अधिकाधिक निराकरण के लिए आवश्यक प्रयास करने पर जोर दिया।
बैठक में सीजेएम निधि शर्मा, जेएमएफसी आकांक्षा खलखो, उज्ज्वल कुमार आईडीबीआई बैंक अंशुल मिश्रा पंजाब नेशनल बैंक सूर्यकांत देवांगन बैंक ऑफ महाराष्ट्र विवेक कुमार एसबीआई जेसी चंद्राकर विद्युत विभाग पुनीत कुमार, पीयूष चंद्र यदु नगर पालिका सीआर चूरेंद्र बीएसएनएल सहित पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू, कला प्रजापति और छबीराज उपस्थित रहे।
इन मामलों का हो सकेगा निराकरण
12 सितंबर को आयोजित नेशनल लोक अदालत में संपत्ति संबंधी विवाद धन वसूली के मामले बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं से जुड़े प्रकरण राजीनामा योग्य दांडिक प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण परिवार न्यायालय में लंबित वैवाहिक एवं अन्य मामले विद्युत अधिनियम से संबंधित प्रकरण तथा समझौता योग्य अन्य राजस्व मामलों का निराकरण किया जाएगा।
लोक अदालत से पक्षकारों को कई लाभ
लोक अदालत में मामलों का निपटारा आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर होने से पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिलता है। ऐसे मामलों में सामान्यतः अपील की आवश्यकता नहीं रहती और समय व धन की बचत होती है। दीवानी प्रकरणों में नियमानुसार कोर्ट फीस की वापसी का भी प्रावधान है। मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों में राजीनामा होने पर बीमा कंपनी द्वारा निर्धारित अवार्ड राशि जमा की जाती है। लोक अदालत के माध्यम से विवादों का समाधान होने से पक्षकारों को बार-बार न्यायालय आने की परेशानी से भी राहत मिलती है। लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है और उसके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता।