विश्वविद्यालय में 18 मांगों को लेकर अचानक भड़के संगीत संकाय के जेन-जी छात्र, कुलपति के खिलाफ खोला मोर्चा

कुलपति हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ के नारों से गूंजा परिसर
नियुक्ति, शोध, भर्ती और वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग
खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में गुरुवार को जेन-जी छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। संगीत संकाय के छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर घंटों धरना दिया और कुलपति प्रो.डॉ.लवली शर्मा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ‘कुलपति हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ’ के नारों से विश्वविद्यालय परिसर गूंजता रहा। छात्रों ने विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक विवादों की शासन स्तर से स्वतंत्र जांच कराने तथा वर्तमान और पूर्व कार्यकाल से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।
सुबह तकरीबन 10:00 बजे अचानक शुरू हुआ प्रदर्शन
सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन देखते ही देखते बड़ा रूप लेता गया। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं लेकिन उनका संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है।
42 दैनिक वेतनभोगियों की सेवा समाप्ति से भर्ती तक उठे कई सवाल
छात्रों ने 42 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति, कन्या छात्रावास में मैट्रन एवं काउंसलर की नियुक्ति, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बाहरी लोगों को बुलाने तथा अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में कथित बदलाव को लेकर सवाल उठाए। तबला, सितार और म्यूजिकोलॉजी में सहायक अध्यापक भर्ती, कथक विभाग में बाहरी विषय विशेषज्ञों की पात्रता तथा डीन के कार्यकाल और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी छात्रों ने जांच की मांग की। उनका आरोप है कि कुछ विभागों में शिक्षकों की कमी के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह कहा है कि उन्हें रियाज करने के लिए वाद्य यंत्र और उपकरण नहीं मिल रहे हैं जिसके कारण उन्हें अपने घर से ही सारे उपकरण और वाद्य यंत्र लाने पड़ रहे हैं ऐसे में विश्वविद्यालय किस काम का रह गया है।
विश्वविद्यालय की शोध व्यवस्था पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने शोधार्थियों के पंजीयन और शोध निर्देशन में नियमों की कथित अनदेखी, दयालबाग संस्थान से शोधार्थियों के स्थानांतरण तथा सेवानिवृत्ति के बाद भी शोध निर्देशन जारी रहने जैसे मुद्दे उठाए। रायगढ़ चक्रधर समारोह और यात्रा मानदेय में कथित दोहराव, निरीक्षण दलों में परिचितों को शामिल करने तथा पीआरओ, वेबसाइट और विश्वविद्यालय कैलेंडर के उपयोग को लेकर भी छात्रों ने सवाल खड़े किए।कुलसचिव और कर्मचारियों के बीच विवाद, तबादलों, दीक्षांत समारोह में उपाधि वितरण की प्रक्रिया, केस प्रक्रिया में नियमों के पालन तथा कुलपति आवास में करीब दो लाख रुपये के वाटर फिल्टर की कथित खरीदी को लेकर भी जांच की मांग की गई।
2018 के विवाद की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कुलपति के पूर्व कार्यकाल से जुड़े वर्ष 2018 के विवाद का भी मुद्दा उठाया। छात्रों ने उस समय की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए सवाल किया कि यदि जांच हुई थी तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। वर्ष 2025 में नियुक्ति के समय सामने आए विरोध के कारणों और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग की गई। छात्रों ने कहा कि शासन स्वतंत्र जांच कराए और वर्तमान तथा पूर्व कार्यकाल से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।*छात्रों को समझाने पहुंचे कुलसचिव, नहीं माने प्रदर्शनकारी*मामले की सूचना मिलते ही कुलसचिव वेंकट आर.गुड़े और संगीत संकाय के अध्यक्ष मानस साहू छात्रों से चर्चा करने पहुंचे। उन्होंने छात्रों से अपनी मांगें लिखित रूप में देने को कहा। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी धरना समाप्त करने को तैयार नहीं हुए। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित शास्त्रीय गायक डॉ.दिवाकर कश्यप की तबीयत अचानक बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई। घटनाक्रम के बाद परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा।
कुलपति बोलीं-जायज मांगें तत्काल पूरी होंगी
पूरे घटनाक्रम पर कुलपति प्रो.डॉ.लवली शर्मा ने कहा कि छात्रों की जो भी जायज मांगें हैं, उनका तत्काल निराकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने यदि पहले उनसे चर्चा की होती तो उचित मांगों पर उसी समय कार्रवाई की जा सकती थी। अधिष्ठाता की नियुक्ति के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया राजभवन से होती है और इसमें विश्वविद्यालय की भूमिका नहीं है। कुलपति ने अचानक हुए प्रदर्शन पर आश्चर्य जताते हुए संवाद के माध्यम से समस्याओं के समाधान की बात कही।
18 सूत्रीय मांगों में क्या-क्या
– 42 दैनिक वेतनभोगियों की सेवा समाप्ति की जांच- छात्रावास मैट्रन व काउंसलर नियुक्ति की जांच- उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में बाहरी लोगों की भूमिका की जांच- अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में बदलाव की जांच- शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग- शोध पंजीयन व निर्देशन में नियमों की जांच- दयालबाग से शोधार्थियों के स्थानांतरण की जांच- सेवानिवृत्ति के बाद शोध निर्देशन की जांच- चक्रधर समारोह व यात्रा मानदेय में कथित दोहराव की जांच- वेबसाइट, पीआरओ व कैलेंडर व्यवस्था की समीक्षा- निरीक्षण दलों के गठन की जांच- कर्मचारियों के साथ व्यवहार व विवादों की जांच- कुलसचिव-कर्मचारी विवाद व तबादलों की जांच- दीक्षांत समारोह में उपाधि वितरण प्रक्रिया की जांच- वाटर फिल्टर खरीदी सहित वित्तीय मामलों की जांच- केस प्रक्रिया में नियमों के पालन की जांच- कथक विभाग में बाहरी विषय विशेषज्ञों की पात्रता की जांच- तबला, सितार, म्यूजिकोलॉजी भर्ती और डीन संबंधी प्रक्रिया की जांच