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भोजली के बहाने खेती और प्रकृति बचाने का संदेश

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। ग्राम पंडरिया में आयोजित भोजली महोत्सव इस बार पारंपरिक उत्सव के साथ-साथ पर्यावरण और खेती-किसानी के मुद्दों को लेकर भी चर्चा में रहा। युवा किसान संघर्ष समिति के आयोजन में बड़ी संख्या में किसान ग्रामीण और क्षेत्रवासी शामिल हुए। कार्यक्रम में जल जमीन जंगल हरियाली और कृषि भूमि के संरक्षण को लेकर सामूहिक संकल्प लिया गया। समिति संरक्षक एवं पूर्व विधायक गिरवर जंघेल ने कहा कि क्षेत्र की पहचान खेती-किसानी और प्राकृतिक संपदा से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सभी को मिलकर प्राकृतिक संसाधनों और कृषि भूमि की रक्षा करनी होगी। क्षेत्र में प्रस्तावित खदान एवं फैक्ट्री को लेकर भी उन्होंने चिंता जाहिर की। समिति अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि भोजली महज एक लोकपर्व नहीं है बल्कि यह मिट्टी, कृषि, हरियाली और प्रकृति के साथ छत्तीसगढ़ी जीवन संस्कृति के जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भोजली जैसे पर्व हमें अपनी जमीन पर्यावरण और कृषि परंपराओं के संरक्षण की जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं।

महोत्सव में वक्ताओं ने कहा कि खेती-किसानी और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को लेकर समाज को जागरूक और संगठित रहने की जरूरत है। जल जमीन जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान भोजली से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। आयोजन ने पारंपरिक संस्कृति के साथ पर्यावरण संरक्षण और कृषि हितों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

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