मंच पर जीवंत हुआ ग्रामीण जीवन, ‘बरदईहा’ ने छोड़ी गहरी छाप
लोक परंपरा, प्रेम और सामाजिक भेदभाव की कहानी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा
खैरागढ़। राजकुमारी इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय कैंपस-2 स्थित प्रेक्षागृह में नाट्य विभाग के विद्यार्थियों ने ‘बरदईहा’ नाटक का प्रभावी मंचन किया। ग्रामीण जीवन, लोक परंपरा, प्रेम और सामाजिक भेदभाव पर केंद्रित प्रस्तुति के दौरान प्रेक्षागृह कई बार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम में कुलपति डॉ.लवली शर्मा सहित प्रो.राजन यादव, डॉ.मानस साहू और डॉ.दीपशिखा पटेल मौजूद रहे। नाटक का लेखन दीपक कुमार साहू और निर्देशन डॉ. शिशु कुमार सिंह ने किया। मंच सज्जा, प्रकाश और संगीत के माध्यम से गांव का जीवंत परिवेश तैयार किया गया। मातर, गौरी-गौरा, लोकगीत और विरह गीतों ने छत्तीसगढ़ी लोकजीवन को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कहानी सरपंच की पढ़ी-लिखी बेटी और बरदईहा के प्रेम संबंध के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। सामाजिक भेदभाव और ग्रामीण सत्ता व्यवस्था के चलते यह रिश्ता दुखद अंत तक पहुंचता है। बरदईहा की हत्या और उसके गर्भवती प्रेमिका के संवाद ने दर्शकों को झकझोर दिया। कलाकारों के अभिनय के साथ संगीत, मंच सज्जा और प्रकाश संयोजन ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाया। संगीत हर्ष चंद्राकर ने संभाला। प्रस्तुति में विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग के विद्यार्थियों ने अभिनय किया।


