
वेदमती और कापालिक शैली की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने बांधा समां
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में पद्मविभूषण स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में पंडवानी की वेदमती और कापालिक दोनों परंपरागत शैलियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से महान लोकगायिका के कला-साधना को नमन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों और अतिथियों ने तीजन बाई के योगदान को भारतीय लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। मुख्य अतिथि पद्मश्री उषा बारले रहीं। अतिथि के रूप में चेतन देवांगन, रम्भा बाई देशमुख, सावित्री पारधी, रेडु देशमुख, आलिम बंशी, केवल देशमुख, चैतराम साहू, रामचंद निषाद, नरोत्तम निषाद तथा तीजन बाई के वरिष्ठ संगतकार डालेश्वर निर्मल मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के कुलसचिव वेंकटरमन गुड़े लोकसंगीत विभाग के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. राजन यादव और संगीत संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. नमन दत्त सहित बड़ी संख्या में शिक्षक विद्यार्थी और कला प्रेमी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति सुप्रसिद्ध पंडवानी कलाकार दुष्यंत द्विवेदी ने दी। उन्होंने वेदमती शैली में द्रौपदी स्वयंवर प्रसंग का प्रभावशाली गायन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत नाटक अकादमी के उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार तथा सीसीआरटी जूनियर फेलोशिप से सम्मानित दुष्यंत द्विवेदी देश के अनेक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। बिलासपुर की वरिष्ठ पंडवानी गायिका दूजन बाई ने कापालिक शैली में द्रौपदी चीरहरण प्रसंग की मार्मिक प्रस्तुति देकर सभागार को भावुक कर दिया। वहीं विश्वविद्यालय के लोकसंगीत विभाग के छात्र हर्ष चंद्राकर ने “दुःशासन वध” प्रसंग का ओजपूर्ण गायन प्रस्तुत किया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। हर्ष पिछले एक दशक से पंडवानी साधना से जुड़े हैं और विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। दुष्यंत द्विवेदी की प्रस्तुति में परसराम यादव ने रागी, जीवनलाल साहू ने हारमोनियम, बिसहत राम साहू ने बैंजो, तुलसीदास मानिकपुरी ने तबला, जीवन्तजय देवदास ने नाल तथा नरेन्द्र विश्वकर्मा ने झुमका पर संगत दी। हर्ष चंद्राकर के साथ ज्ञानेश्वर टांडिया, डोमन साहू, उजित निषाद, वेदप्रकाश रावटे, करन तारम, खिलेश साहू और समीर चंद्र साहू ने विभिन्न वाद्यों पर प्रभावी संगत प्रस्तुत की है। समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनकी कला और साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। कार्यक्रम में प्रस्तुत वेदमती और कापालिक शैली की प्रस्तुतियों ने श्रद्धांजलि समारोह को यादगार बना दिया है।


