
अविभाजित राजनांदगांव जिले के 30 गांवों में 60 स्वयंसेवक करेंगे सर्वेक्षण

खैरागढ़। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) खैरागढ़ द्वारा प्राचार्य वाईडी साहू के मार्गदर्शन में 31 अक्टूबर एवं 1 नवंबर 2026 को अविभाजित राजनांदगांव जिले के चयनित 30 गांवों में प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के वार्षिक शिक्षा स्थिति प्रतिवेदन (एसर-2026) का सर्वेक्षण किया जाएगा।सर्वेक्षण के लिए राज्य स्तरीय पांच दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण 12 से 16 अक्टूबर तक प्रथम अरोरा सेंटर फॉर एजुकेशन, कुरूद (छत्तीसगढ़) में आयोजित किया गया। इसके बाद प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर दौलत कुमार एवं उमेश कुमार साहू द्वारा डाइट खैरागढ़ में राष्ट्रीय सेवा योजना के चयनित 60 स्वयंसेवकों को 27 से 29 अक्टूबर तक सर्वेक्षण संबंधी प्रशिक्षण दिया गया।
बच्चों की शैक्षणिक एवं डिजिटल दक्षता का होगा आकलन
इस सर्वेक्षण में 3 से 6 वर्ष के बच्चों की बालवाटिका एवं प्री-प्राइमरी में भागीदारी, 6 से 16 वर्ष के बच्चों के नामांकन, पढ़ने-लिखने एवं गणितीय क्षमताओं तथा 14 से 16 वर्ष के बच्चों की डिजिटल पहुंच, स्मार्टफोन उपयोग एवं डिजिटल कौशल का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही माता-पिता की शिक्षा एवं पारिवारिक परिस्थितियों से संबंधित जानकारी भी जुटाई जाएगी।डाइट के परीक्षा प्रभारी एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी कृष्ण कुमार वर्मा ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नई दिल्ली स्तर से रेंडम प्रक्रिया द्वारा 30 गांवों का चयन किया गया है। प्रत्येक गांव में प्राथमिक विद्यालय के साथ रेंडम तरीके से 20 घरों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके लिए दो-दो स्वयंसेवकों के समूह बनाए गए हैं। सर्वेक्षण के आंकड़े डाइट में संकलित कर विश्लेषण के लिए प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन को भेजे जाएंगे जो देश में शिक्षा संबंधी योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में उपयोगी होंगे।
इन विकासखंडों के गांवों में होगा सर्वेक्षण
चयनित 30 गांवों में डोंगरगढ़ के 3, अंबागढ़ चौकी के 4, छुरिया के 3, छुईखदान के 5, डोंगरगांव के 3, राजनांदगांव के 07, खैरागढ़ के 4 एवं मोहला के 1 गांव शामिल हैं।मुख्य सर्वेक्षण से पूर्व स्वयंसेवकों को शासकीय प्राथमिक शाला पिपरिया, नवीन पिपरिया, मोगरा, अकरजन, लालपुर एवं भुलाटोला में पायलटिंग कराकर सर्वेक्षण प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया है। डाइट खैरागढ़ द्वारा आयोजित यह सर्वेक्षण ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शैक्षणिक स्थिति एवं बुनियादी दक्षताओं की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगा।
