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खाद की कालाबाजारी पर सख्ती: अब अधिकारियों की निगरानी में होगा उर्वरक वितरण

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उचित मूल्य पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा उर्वरकों की कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। जनपद पंचायत खैरागढ़ में आयोजित कृषि विभाग की समीक्षा बैठक के बाद जिले के निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों की नियमित निगरानी का निर्णय लिया गया है। 11 जून को जनपद पंचायत सभाकक्ष में कृषि समिति की अध्यक्ष डॉ.राजेश्री त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में किसानों से प्राप्त शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में यह सामने आया कि कई स्थानों पर किसानों को निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूले जाने तथा उर्वरकों के साथ अन्य सामग्री की जबरन टैगिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। बैठक में कृषि समिति के सभापति कोमल सिंह, एसएडीओ ए.के. धमरी, सहायक संचालक कृषि लुकमान साहू सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुरूप उप संचालक कृषि कार्यालय द्वारा 12 जून को आदेश जारी कर जिले के 30 निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों में कृषि विकास अधिकारियों एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। इन अधिकारियों को प्रतिदिन संबंधित दुकानों में उपस्थित रहकर खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जारी निर्देशों के अनुसार नियुक्त अधिकारी प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक विक्रय केंद्रों में मौजूद रहेंगे। वे उर्वरकों के ओपनिंग और क्लोजिंग स्टॉक का सत्यापन करेंगे तथा यह सुनिश्चित करेंगे कि यूरिया, डीएपी और पोटाश सहित सभी उर्वरकों की बिक्री निर्धारित सरकारी दर पर ही हो। इसके अलावा किसानों पर किसी भी प्रकार की अनावश्यक या जबरन टैगिंग न हो इसकी भी विशेष निगरानी की जाएगी।

कृषि विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विक्रय केंद्र में स्टॉक पंजी का नियमित संधारण अनिवार्य किया है। अब प्रतिदिन स्टॉक की ओपनिंग और क्लोजिंग एंट्री दर्ज की जाएगी तथा क्लोजिंग के समय संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर भी आवश्यक होंगे। इससे उर्वरकों की उपलब्धता, बिक्री और स्टॉक की वास्तविक स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।

कृषि विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी, कृत्रिम कमी पैदा करने और अधिक कीमत वसूली जैसी शिकायतों पर रोक लगेगी। साथ ही किसानों को समय पर और निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी।

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