
खरीफ सीजन में किसानों को हो रही परेशानी; दवा, खाद-एनपीके की बिक्री, बिलिंग, लाइसेंस और स्टॉक की व्यापक जांच की उठी मांग
सत्यमेव न्यूज बाजार अतरिया। खरीफ सीजन के बीच बाजार अतरिया क्षेत्र के कुछ कृषि केंद्रों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रायपुर से जांच टीम आने की चर्चा के बीच क्षेत्र के कुछ कृषि केंद्र संचालकों द्वारा पिछले तीन दिनों से दुकानें बंद रखे जाने की बात सामने आ रही है। इससे किसानों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि दुकानें बंद रहने के कारणों और जांच संबंधी किसी कार्रवाई की कृषि विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। खेती किसानी के महत्वपूर्ण समय में कृषि दवाइयां खाद एनपीके और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स खरीदने के लिए किसान कृषि केंद्रों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में कुछ दुकानों के बंद मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि कृषि केंद्र नियमानुसार संचालित हो रहे हैं तो जांच की सूचना के बाद दुकानें बंद रखने की स्थिति क्यों बन रही है इसकी भी विभाग को जांच करनी चाहिए।
लाइसेंस और दस्तावेजों की जांच की मांग
किसानों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र के कुछ कृषि केंद्रों में आवश्यक लाइसेंस एवं दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। किसानों की मांग है कि जांच के दौरान प्रत्येक कृषि केंद्र के लाइसेंस स्टॉक रजिस्टर खरीद-बिक्री के दस्तावेज कंपनियों से खरीदी के बिल और बिक्री संबंधी रिकॉर्ड का मिलान किया जाए। किसानों का यह भी कहना है कि जांच केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे बल्कि मौके पर उपलब्ध स्टॉक और दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन भी किया जाए।
बिना बिल बिक्री के आरोप, कीमतों की भी हो जांच
कई किसानों ने कृषि दवाइयों एवं अन्य कृषि सामग्री की खरीद के दौरान विधिवत बिल नहीं मिलने की शिकायत की है। कुछ किसानों ने उत्पाद की कीमत और उनसे वसूली गई राशि में अंतर होने की आशंका भी जताई है। किसानों की मांग है कि कृषि केंद्रों पर एमआरपी खरीद बिल बिक्री बिल और स्टॉक का मिलान कराया जाए। साथ ही बिना बिल बिक्री की शिकायत मिलने पर संबंधित विक्रेता से जवाब लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
एनपीके और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की बिक्री पर भी उठे सवाल
क्षेत्र के कृषि केंद्रों में विभिन्न प्रकार के एनपीके एवं माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की बिक्री को लेकर भी किसानों ने जांच की मांग की है। किसानों के अनुसार बाजार में NPK 10:26:26, 12:32:16, 14:35:14, 15:15:15, 16:16:16, 19:19:19, 20:20:0, 24:24:0, 28:28:0, 13:40:13, 00:52:34 (MKP) तथा 13:00:45 (पोटैशियम नाइट्रेट) जैसे उत्पादों के अलावा जिंक सल्फेट, फेरस सल्फेट, मैंगनीज सल्फेट, कॉपर सल्फेट, बोरेक्स, बोरिक एसिड, मोलिब्डेनम मल्टी माइक्रोन्यूट्रिएंट एवं विभिन्न चिलेटेड माइक्रोन्यूट्रिएंट उपलब्ध हैं। किसानों का कहना है कि इन उत्पादों की बिक्री के लिए संबंधित केंद्रों के पास आवश्यक अनुमति लाइसेंस और दस्तावेज हैं या नहीं इसकी विभागीय स्तर पर जांच की जानी चाहिए।
फसल नुकसान की शिकायतों पर हो प्रयोगशाला जांच
कुछ किसानों ने कृषि दवाइयों के उपयोग के बाद फसलों को नुकसान होने की आशंका भी जताई है। किसानों की मांग है कि ऐसी शिकायतों वाले उत्पादों के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में गुणवत्ता की जांच कराई जाए। हालांकि किसी विशेष दवा से फसल खराब होने की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
जांच को लेकर किसानों में बढ़ी उम्मीद
किसानों का कहना है कि कृषि केंद्रों की जांच केवल दुकान के लाइसेंस या स्टॉक तक सीमित नहीं होनी चाहिए। दवाइयों की गुणवत्ता निर्धारित कीमत बिलिंग व्यवस्था खाद-एनपीके एवं माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की वैध बिक्री स्टॉक और खरीद-बिक्री के पूरे रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। किसानों ने कृषि विभाग से बाजार अतरिया क्षेत्र के सभी कृषि केंद्रों की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच कराने तथा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता एवं कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल कृषि केंद्र संचालकों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित संचालकों का पक्ष और कृषि विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

