
योजनाएं कागजों में पूरी, जमीन पर अधूरी
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पौनी पसारी योजना पर उठे सवाल
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। नगर पालिका परिषद खैरागढ़ इन दिनों लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और प्रशासनिक सवालों के कारण चर्चा में है। विकास कार्यों, भुगतान प्रक्रियाओं, खरीदी और कथित कमीशनखोरी को लेकर उठ रहे आरोपों ने स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। ताजा मामला राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पौनी पसारी योजना से जुड़ा है। वर्ष 2019-20 में परिषद की सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित कर पिपरिया वार्ड और इतवारी बाजार वार्ड में बाजार निर्माण का निर्णय लिया गया था। संकल्प क्रमांक-10 के तहत भूमि आबंटन के लिए प्रस्ताव एसडीएम को भेजने तथा शासन को सूचित करने का निर्णय दर्ज किया गया था। हालांकि, दस्तावेजों के अनुसार जिस पिपरिया वार्ड में बाजार निर्माण स्वीकृत था, वहां अब तक योजना का कोई अस्तित्व नजर नहीं आता। इसके विपरीत लगभग चार किलोमीटर दूर इतवारी बाजार क्षेत्र में निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया। आरोप है कि निविदा से लेकर अनुबंध तक सभी अभिलेखों में निर्माण स्थल पिपरिया दर्ज रहा, जबकि वास्तविक निर्माण अन्य स्थान पर कराया गया। रिकॉर्ड बताते हैं कि सितंबर 2021 में निविदा प्रक्रिया प्रारंभ हुई, फरवरी 2022 में कार्य एजेंसी से अनुबंध किया गया और निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण पूर्ण कर भुगतान भी जारी कर दिया गया। भुगतान के दौरान कर कटौती की औपचारिकताएं भी पूरी की गईं, लेकिन मुख्य प्रश्न यह है कि स्वीकृत स्थल बदलने की अनुमति किस अधिकारी ने दी और किस आधार पर निर्माण स्थल परिवर्तित किया गया।
इसका सीधा असर पिपरिया वार्ड के स्थानीय व्यापारियों और निवासियों पर पड़ा है।

जिन लोगों को योजना का लाभ मिलना था, वे अब भी सड़क किनारे व्यवसाय करने को मजबूर बताए जा रहे हैं। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बरेठपारा वार्ड में नाली और सीसी रोड निर्माण कार्यों में भी बिना अनुमति स्थल परिवर्तन के आरोप सामने आ चुके हैं। इससे नगर पालिका की परियोजना क्रियान्वयन प्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं। इसी बीच वर्ष 2021 में खरीदी गई लगभग 36 लाख रुपये मूल्य की 1000 किलोग्राम क्षमता वाली कंपोस्ट मशीन भी विवादों में है। आरोप है कि मशीन आज तक चालू नहीं हो सकी, बावजूद इसके मरम्मत के नाम पर कई बार भुगतान किया गया। खरीदी प्रक्रिया में निविदा समिति की भूमिका, प्रशासनिक स्वीकृति और कर नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी प्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों के स्थल निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच की मांग की है। गड़बड़ी सिद्ध होने की स्थिति में उच्च स्तर पर शिकायत और कार्रवाई की बात कही जा रही है। फिलहाल, नगर पालिका खैरागढ़ की कार्यप्रणाली को लेकर आमजन में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन जांच कर तथ्य सामने लाता है या मामला कागजी फाइलों तक सीमित रह जाता है।

