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आस्था का महासागर बना पांडादाह, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में उमड़े 40 हजार से अधिक श्रद्धालु

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। अविभाजित राजनांदगांव जिले की आस्था का प्रमुख केंद्र ग्राम पांडादाह स्थित ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार 16 जुलाई को आयोजित रथयात्रा महापर्व ने श्रद्धा, भक्ति और जनसमूह की दृष्टि से नया इतिहास रच दिया। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के दर्शन के लिए 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार पिछले दो दशकों में पहली बार इतनी विशाल संख्या में श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल हुए। दोपहर ठीक 12 बजे भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर विराजमान हुए। पुरोहित परिवार के सदस्य पं.उज्जवल दत्त झा एवं अन्य श्रद्धालुओं के कंधों पर विराजकर तीनों विग्रहों ने मंदिर की परिक्रमा की। जैसे ही भगवान मंदिर से बाहर आए, पूरा परिसर “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति और भावनाओं के आंसू छलक पड़े, वहीं श्रद्धालु नृत्य-कीर्तन करते हुए पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करते रहे। यह अलौकिक दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पुलिस और प्रशासन को व्यवस्था बनाए रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ इतनी अधिक थी कि सुरक्षा व्यवस्था में लगे जवानों को भी लगातार सतर्क रहना पड़ा। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान जगन्नाथ के प्रति अटूट विश्वास और मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता के कारण इस वर्ष बड़ी संख्या में लोग धन्यवाद अर्पित करने भी पहुंचे। महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद मंदिर सेवा समिति के सभी सदस्य एक समान पीले वस्त्र धारण कर दर्शनार्थियों की सेवा में जुटे रहे।

श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहायता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं निरंतर संचालित होती रही। आयोजन में समिति के अध्यक्ष पं.मिहिर झा, पूर्व विधायक भुवनेश्वर बघेल सहित हजारों श्रद्धालु संकीर्तन यात्रा एवं महायज्ञ में शामिल हुए। रथयात्रा के अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। हरियाणा के एक कृषक द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क हलवा-पूरी महाप्रसाद वितरित किया गया वहीं मीनाक्षी फ्यूल्स की ओर से भी विशाल भोज-भंडारे की व्यवस्था की गई। मंदिर सेवा समिति ने हेल्पलाइन के माध्यम से श्रद्धालुओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। रथयात्रा के बाद पांडादाह एवं आसपास के गांवों में तीन दिनों तक दीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु अपने घरों के सामने गोबर से लिपाई कर रंगोली सजाते हैं और दीप जलाकर भगवान जगन्नाथ का स्वागत करते हैं। पूरे क्षेत्र में दीपोत्सव जैसा आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिलता है। ऐसी मान्यता है कि रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अगले वर्ष श्रद्धालु धन्यवाद ज्ञापित करने पुनः यहां पहुंचते हैं। मंदिर सेवा समिति के पं.मिहिर झा के अनुसार पांडादाह का वार्षिक रथयात्रा मेला 18 जुलाई तक जारी रहेगा जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस वर्ष उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने एक बार फिर पांडादाह की रथयात्रा को छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अविभाजित राजनांदगांव जिले की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में विशेष पहचान दिलाई है।

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