

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। वनांचल शिक्षा सेवा न्यास, रायपुर द्वारा संचालित सरस्वती शिक्षा केंद्रों के नवीन एवं वरिष्ठ आचार्यों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खैरागढ़ में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि भागवत शरण सिंह ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसमें ज्ञान के साथ संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का समावेश हो। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों के बच्चों तक निःशुल्क एवं संस्कारयुक्त शिक्षा पहुंचाने का कार्य समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम की अध्यक्षता शशांक ताम्रकार ने की, जबकि मुख्य वक्ता राम यादव रहे। अपने संबोधन में शशांक ताम्रकार ने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षण पद्धति में भी नवाचार जरूरी है। उन्होंने आचार्यों से सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक उपयोग कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का आह्वान किया है। मुख्य वक्ता राम यादव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों के शारीरिक मानसिक बौद्धिक और नैतिक विकास के संतुलित प्रयासों से ही सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण संभव है। उन्होंने प्रशिक्षण वर्गों को शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास और समाज सेवा की भावना को मजबूत करने वाला प्रभावी माध्यम बताया। प्रशिक्षण वर्ग में खैरागढ़, छुईखदान एवं डोंगरगढ़ संकुलों से 55 आचार्य आचार्याओं ने भाग लिया है। तीन दिनों तक शिक्षण कौशल भारतीय संस्कृति आदर्श आचार्य की भूमिका प्रार्थना शिशु गीत शारीरिक गतिविधियों तथा बालक के समग्र विकास जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया है।समापन समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आचार्यों का सम्मान भी किया गया है। इस अवसर पर मोतीलाल यादव, मनोहर लाल चंदेल, नीलिमा गोस्वामी, रेखा गुप्ता, गरिमा तिवारी, निक्कू श्रीवास, भूपेंद्र गंगबोइर, खेमन वर्मा, रोशन जंघेल, अनुज नेताम सहित बड़ी संख्या में आचार्य-आचार्याएं उपस्थित रहे।


