रायपुर

महिलाओं व नाबालिगों के धर्मांतरण पर 20 वर्ष तक की सजा का कड़ा प्रावधान

रायपुर। राज्य में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों पर सख्ती लाते हुए सरकार ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक–2026 को विधानसभा में पारित कर दिया है। नए कानून के तहत विशेष रूप से महिलाओं, नाबालिगों, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं अन्य कमजोर वर्गों के धर्मांतरण मामलों में अब 20 वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है वहीं सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा निर्धारित की गई है। विधानसभा में गृह मंत्री द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक पर विपक्ष ने चर्चा का बहिष्कार किया जिसके चलते सदन में मुख्य रूप से सत्तापक्ष के सदस्यों की भागीदारी रही। सरकार का कहना है कि यह कानून राज्य में जबरन प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार धर्मांतरण से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा जिससे मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित हो सके।

विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस लौटता है तो उसे धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। धर्मांतरण की प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति और धर्मांतरण कराने वाले को पहले से जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना मिलने के बाद प्रशासन द्वारा जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रक्रिया में किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या छल शामिल न हो। मुख्यमंत्री ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि भय, लोभ और अज्ञानता के आधार पर होने वाले धर्मांतरण को अब प्रभावी रूप से रोका जा सकेगा। यह कानून समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।सरकार के अनुसार वर्तमान कानून में केवल सूचना देने का प्रावधान था जिससे जबरन धर्मांतरण को रोकना कठिन हो रहा था। नए कानून में कड़े दंड और स्पष्ट प्रक्रिया के माध्यम से इस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। यह नया विधेयक राज्य में सामाजिक संतुलन बनाए रखने और अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Related Articles

Back to top button

You cannot copy content of this page