
छिंदारी और नत्थेला बांध में विभाग की निगरानी पर सवाल
विभाग को शिकायतों की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप, पट्टा और अनुमति की हो जांच
सत्यमेव न्यूज छुईखदान। मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए मत्स्य आखेट पर लगाए गए प्रतिबंध के बीच छुईखदान क्षेत्र के छिन्दारी और नत्थेला बांध में लगातार मछली पकड़े जाने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिबंधित अवधि के बावजूद दोनों जलाशयों में सुबह से शाम तक जाल डालकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है। शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से मत्स्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार छिन्दआरी और नत्थेला बांध में मछली पकड़ने का सिलसिला किसी एक दिन तक सीमित नहीं है। कथित तौर पर रोजाना लोग जाल लेकर जलाशयों में पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान मछलियों के प्रजनन का समय होने के कारण आखेट पर रोक का उद्देश्य मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करना है लेकिन प्रतिबंध के बावजूद गतिविधियां जारी रहने से संरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
मत्स्य पालन के लिए दिए गए जलाशयों की हो जांच
ग्रामीणों के मुताबिक दोनों बांधों को मनोज झारखंडे द्वारा मछली पालन के लिए लिया गया है। आरोप है कि इसी व्यवस्था के तहत प्रतिबंधित अवधि में भी मछली पकड़ने की गतिविधियां जारी हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग यह स्पष्ट करे कि दोनों जलाशय किस प्रक्रिया के तहत मत्स्य पालन के लिए दिए गए हैं और पट्टे या अनुबंध में प्रतिबंधित अवधि के दौरान आखेट को लेकर क्या शर्तें निर्धारित हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि बांधों में मछली पकड़े जाने की जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद मौके पर नियमित निरीक्षण अथवा कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रतिबंध लागू है तो विभाग को जलाशयों में नियमित गश्त और औचक निरीक्षण कर नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
प्रजनन काल में आखेट से मत्स्य संपदा को नुकसान की आशंका
ग्रामीणों ने कहा कि प्रजनन काल में मछलियों के बड़े पैमाने पर शिकार से भविष्य की मत्स्य संपदा प्रभावित हो सकती है। इसका असर जलाशयों में मछलियों की संख्या के साथ-साथ मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है। ऐसे में प्रतिबंधित अवधि में आखेट पर प्रभावी रोक जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन और मत्स्य विभाग से छिन्दआरी एवं नत्थेला बांध का औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही दोनों जलाशयों के मत्स्य पालन संबंधी पट्टे अनुबंध अनुमति और उसकी शर्तों की जांच की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी
मछली पकड़ने की गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों द्वारा मनोज झारखंडे के संरक्षण में आखेट किए जाने का आरोप लगाया गया है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की विभागीय जांच जरूरी मानी जा रही है। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिबंधित अवधि में जलाशयों में मत्स्य आखेट किसके निर्देश या अनुमति से हो रहा है और इसमें नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। छिन्दआरी और नत्थेला बांध में प्रतिबंध के बावजूद कथित रूप से जारी मत्स्य आखेट की शिकायत के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और मत्स्य विभाग की कार्रवाई पर है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए दोनों जलाशयों का निरीक्षण करे और नियमों के अनुरूप स्थिति स्पष्ट करे। यदि प्रतिबंध का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए वहीं आरोप सही नहीं पाए जाने पर विभाग वस्तुस्थिति सार्वजनिक करे।
