खरीफ 2026 में बीमा कराने वाले गैर-ऋणी किसानों की संख्या 11,338 से बढ़कर 21,186 हुई, बीमित क्षेत्रफल में भी 81% की वृद्धि
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले ने खरीफ 2026 में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। पिछले वर्ष की तुलना में फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या और बीमित क्षेत्रफल में वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे खास बात गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी में हुई बढ़ोतरी है जो किसानों के बीच फसल बीमा को लेकर बढ़ती जागरूकता और भरोसे को दर्शाती है। गैर-ऋणी किसानों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी खरीफ 2025 में जिले से 11,338 गैर-ऋणी किसानों के आवेदन प्राप्त हुए थे। खरीफ 2026 में यह संख्या बढ़कर 21,186 हो गई। इस तरह गैर-ऋणी किसानों की संख्या में करीब 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी बताती है कि अब अधिक किसान स्वयं आगे आकर अपनी फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के जोखिम से सुरक्षित करने के लिए फसल बीमा का सहारा ले रहे हैं।
बीमित क्षेत्रफल भी 81 प्रतिशत बढ़ा
गैर-ऋणी किसानों के बीमित क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खरीफ 2025 में 2,972 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ था जो खरीफ 2026 में बढ़कर 5,399 हेक्टेयर हो गया। इस प्रकार गैर-ऋणी किसानों के बीमित क्षेत्रफल में करीब 81 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ऋणी किसानों की भागीदारी में भी इजाफा
योजना के तहत ऋणी किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। खरीफ 2025 में 3,12,493 ऋणी किसानों के आवेदन प्राप्त हुए थे जबकि खरीफ 2026 में यह संख्या बढ़कर 3,15,857 हो गई। इसी तरह ऋणी किसानों का बीमित क्षेत्रफल 71,874 हेक्टेयर से बढ़कर 72,270 हेक्टेयर हो गया है। ऋणी किसानों की एंट्री की प्रक्रिया अभी जारी है इसलिए आंकड़ों में और वृद्धि होने की संभावना है।
फसल बीमा बना किसानों का सुरक्षा कवच
जिले में फसल बीमा योजना को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। किसानों की बढ़ती भागीदारी से यह स्पष्ट है कि वे प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के आर्थिक जोखिम को कम करने के लिए बीमा को महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में अपना रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण फसल को नुकसान होने की स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिले में फसल बीमा के प्रति बढ़ता रुझान कृषि क्षेत्र को अधिक सुरक्षित स्थिर और जोखिम-प्रतिरोधी बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

