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खैरागढ़ जनपद के पंचायतों में भुगतान पर गहराया विवाद

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जनपद पंचायत खैरागढ़ में शनिवार को सरपंच संघ की विशेष बैठक के दौरान पंचायत कार्यों के भुगतान में कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। बैठक में उपस्थित कई सरपंचों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के बिलों का भुगतान और चेक जारी करने की प्रक्रिया में कथित रूप से अवैध राशि की मांग की जाती है। हालांकि जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

बैठक में कई पंचायत प्रतिनिधियों ने दावा किया कि ग्राम स्तर पर संपन्न निर्माण एवं अन्य विकास कार्यों के भुगतान महीनों तक लंबित रखे जाते हैं। उनका आरोप है कि जब तक संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को कथित रूप से कमीशन नहीं दिया जाता तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ती। सरपंचों ने इसे न केवल विकास कार्यों में बाधा बताया बल्कि कहा कि इससे ग्रामीणों के बीच उनकी साख भी प्रभावित हो रही है। कुछ सरपंचों ने चेक जारी करने की प्रक्रिया में भी अवैध मांग का आरोप लगाया। बैठक में मौजूद अन्य प्रतिनिधियों ने भी इन दावों का समर्थन किया। सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से अपनी बात रखी लेकिन व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक न करने का आग्रह किया।

बैठक के दौरान सीईओ के व्यवहार और कार्यालयीन कार्यप्रणाली को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया। कुछ सरपंचों ने आरोप लगाया कि शिकायतों पर समय पर सुनवाई नहीं होती और अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। संघ ने इस स्थिति में सुधार की मांग करते हुए आवश्यक होने पर उच्च स्तर तक शिकायत ले जाने का निर्णय लिया।

बैठक में संघ से जुड़े सरपंचों ने कहा कि 15वें वित्त आयोग की राशि समय पर जारी नहीं होने से कई पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। भुगतान लंबित रहने के कारण कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरे हैं और ठेकेदार आगे काम करने में हिचकिचा रहे हैं। इस संबंध में सामूहिक ज्ञापन तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपने की बात कही गई। राशन कार्ड और बैंक खातों पर भी चर्चा बैठक में राशन कार्ड सूची से नाम विलोपन और संशोधन से जुड़ी समस्याएं भी उठाई गई। सरपंचों का कहना था कि पंचायत स्तर से प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद कई मामलों में कार्रवाई लंबित है जिससे पात्र हितग्राहियों को परेशानी हो रही है। इसके अतिरिक्त पंचायत खातों के संचालन में आ रही बैंकिंग दिक्कतों पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने ऐसे बैंकों में खाते स्थानांतरित करने का सुझाव दिया जहां लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुगम हो।

जनपद पंचायत खैरागढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राशन कार्ड से संबंधित प्रक्रियाएं जिला स्तर पर संपन्न होती हैं और जनपद कार्यालय केवल प्रस्ताव अग्रेषित करता है। 15वें वित्त आयोग की राशि सीधे ग्राम पंचायतों के खातों में स्थानांतरित होती है जिस पर जनपद का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि बैंक खाता पंचायत का स्वयं का खाता होता है जिसे इच्छानुसार बदला जा सकता है। कमीशन लेकर बिल पास करने या चेक जारी करने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने दावा किया कि अधिकांश भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से होते हैं और प्रक्रियाएं पारदर्शी हैं। अपने व्यवहार को लेकर लगाए गए आरोपों पर उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में किसी भी सरपंच के साथ उनका कोई विवाद नहीं हुआ है। बहरहाल सरपंच संघ ने संकेत दिया है कि यदि मांगों पर शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो जिला प्रशासन से लेकर राज्य स्तर तक शिकायत दर्ज कराई जाएगी। कुछ प्रतिनिधियों ने आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच समन्वय और पारदर्शिता के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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