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‘ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण’ के तहत विश्वविद्यालय ग्रंथालय का निरीक्षण, डिजिटलीकरण पर जोर

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण को लेकर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में विशेष पहल शुरू की गई है। ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत कलेक्टर इंद्रजीत चंद्रवाल ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के केंद्रीय ग्रंथालय का निरीक्षण कर वहां सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रंथालय में संरक्षित पांडुलिपियों की स्थिति संरक्षण व्यवस्था और वर्गीकरण संबंधी कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां देश की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इनमें इतिहास साहित्य संगीत और विभिन्न विषयों से जुड़ी अमूल्य जानकारियां सुरक्षित हैं जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने ग्रंथालय प्रबंधन को निर्देशित किया कि सभी पांडुलिपियों की व्यवस्थित सूची तैयार कर उन्हें भाषा विषय और कालखंड के आधार पर वर्गीकृत किया जाए। साथ ही संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञों की सहायता लेने पर भी जोर दिया। कलेक्टर ने पांडुलिपियों के चरणबद्ध डिजिटलीकरण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए ताकि शोधार्थियों और विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से भी इन दुर्लभ दस्तावेजों तक पहुंच मिल सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल अभिलेखीकरण से आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान संपदा को सुरक्षित रखा जा सकेगा। निरीक्षण के दौरान एडिशनल कलेक्टर सुरेंद्र कुमार ठाकुर, एसडीएम टंकेश्वर साहू, डॉ. जितेंद्र साखरे, डॉ. मंगलानंद झा तथा पुस्तकालय प्रभारी डॉ. जे. मोहन सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर सहमति जताई।

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