
योजनाओं के अभिसरण से जल-संरक्षण बना खेती और आजीविका का आधार
खैरागढ़. ग्राम पंचायत कानीमेरा के किसान अशोक कुमार सिरदार के लिए आजीविका डबरी अब केवल जल-संरक्षण का साधन नहीं बल्कि खेती और अतिरिक्त आय का आधार बन गई है। योजनाओं के अभिसरण से तैयार इस परिसंपत्ति से सिंचाई, मेड़ पर फसल और मछली पालन जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। वीबी-जी राम जी योजना के तहत जनवरी 2026 में 1.99 लाख रुपये की लागत से आजीविका डबरी स्वीकृत हुई थी। गांव के श्रमिकों ने अप्रैल 2026 में इसका निर्माण पूरा किया। वर्षा जल के संचय से डबरी में पानी उपलब्ध हुआ जिसका उपयोग अब खेती में किया जा रहा है। किसान ने डबरी के आसपास करीब 2 एकड़ में धान की फसल लगाई है जो वर्तमान में लहलहा रही है। अशोक कुमार ने डबरी की मेड़ का भी उपयोग करते हुए वहां अरहर की फसल लगाई है वहीं मत्स्य पालन गतिविधि से अभिसरण के तहत जुलाई माह में उन्हें रोहू, कतला और मृगल प्रजाति के 50 पैकेट मछली बीज अनुदान के रूप में उपलब्ध कराए गए जिसके बाद डबरी में मछली पालन शुरू किया गया। इस प्रकार एक ही परिसंपत्ति खेती, अतिरिक्त फसल और मत्स्य पालन को सहारा दे रही है। डबरी का संचित पानी सिंचाई में उपयोग हो रहा है, मेड़ पर अरहर की फसल तैयार हो रही है और मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी की संभावना बनी है। योजनाओं के अभिसरण से जल-संरक्षण की यह पहल अब किसान की खेती और आजीविका को मजबूत करने का आधार बन गई है।
