
पांच वर्षों में लगाए 5 हजार पौधे
गौवंश व वन्य जीवों के लिए बनाया विशाल तालाब
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला ने गौ संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के समन्वित मॉडल की मिसाल पेश की है। गौशाला परिसर में पिछले पांच वर्षों के दौरान लगभग 5 हजार पौधों का रोपण कर हरित क्षेत्र विकसित किया गया है वहीं गौवंश एवं वन्य जीवों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक विशाल तालाब का निर्माण भी कराया गया है। गौशाला प्रबंधन के अनुसार संस्था केवल गौ सेवा तक सीमित नहीं है बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है। परिसर में विकसित हो रहा हरित क्षेत्र गौवंश के लिए प्राकृतिक एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूत कर रहा है। संस्था द्वारा गौ आधारित जैविक उत्पादों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रबंधन का मानना है कि वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जैविक कृषि जैसे प्रयास भूमि की उर्वरता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हर नागरिक लगाए एक पौधा- डॉ.जैन
विश्व पर्यावरण दिवस पखवाड़े पर मनोहर गौशाला के संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी डॉ.अखिल जैन (पदम) ने नागरिकों से हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने, प्लास्टिक एवं रासायनिक प्रदूषण कम करने तथा गौ एवं पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। डॉ.जैन ने कहा कि गौ संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। गौ आधारित जैविक उत्पाद प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हैं, जिससे भूमि, जल और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा, “जहां वृक्ष हैं वहां जीवन है और जहां प्रकृति सुरक्षित है, वहीं मानवता का भविष्य भी सुरक्षित है।” ज्ञात हो कि मनोहर गौशाला का यह प्रयास गौ सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल बनकर उभर रहा है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और संतुलित भविष्य की दिशा में प्रेरणादायी कदम साबित हो सकता है।
