
विद्यार्थियों ने सीखी शास्त्रीय संगीत की गहराइयाँ
विशेषज्ञ ने दिया तकनीकी प्रशिक्षण
खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय एक बार फिर संगीत साधना का केंद्र बना जब तंत्री वाद्य विभाग में आयोजित छः दिवसीय सितार वादन कार्यशाला का सफल समापन हुआ। विशेष प्रशिक्षण शिविर में देश की प्रख्यात संगीत विशेषज्ञ प्रो.कविता चक्रवर्ती ने विद्यार्थियों को सितार वादन की सूक्ष्म तकनीकों से अवगत कराया। कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति प्रो.लवली शर्मा द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम में संकाय के शिक्षक, संगतकार एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान राग यमन, हमीर एवं श्याम कल्याण की विस्तृत व्याख्या करते हुए विलंबित और द्रुत गत का अभ्यास कराया गया। लगभग 30 से अधिक विद्यार्थियों ने इस कार्यशाला का लाभ उठाया। कार्यशाला ने विद्यार्थियों में संगीत के प्रति नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ द्वारा विद्यार्थियों को सितार वादन की तकनीक, रागों की संरचना एवं प्रस्तुति शैली का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। राग यमन, हमीर एवं श्याम कल्याण के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान दिया गया। कार्यक्रम का संचालन स.प्राध्यापक एवं संयोजक विवेक नवरे द्वारा किया गया। कार्यशाला में 30 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लेकर लाभ प्राप्त किया। सितार के सुरों से विश्वविद्यालय की फिजा सजी रही और 30 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से शिविर में भाग लेकर अपने संगीत कौशल को निखारा। यह आयोजन संगीत साधना की ओर एक प्रेरणादायक पहल माना जा रहा है।

