
नई खरीदी के प्रस्तावों के बीच पुरानी कुर्सियों का हिसाब भी जरूरी

पुरानी सामग्री की उपलब्धता और उपयोगिता स्पष्ट करने की हो रही मांग
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। खैरागढ़ नगर पालिका में विभिन्न वार्डों के लिए नई सामग्री की खरीदी के प्रस्ताव सामने आने के बाद पुरानी खरीदी गई सामग्री की उपलब्धता और उपयोगिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रस्तावित खरीदी में अलग-अलग वार्डों के लिए डेस्क-बेंच आरसीसी एवं स्टील कुर्सियां तथा एलईडी लाइट की नए सिरे से खरीददारी शामिल हैं। ऐसे में मामला सामने आने के बाद नई खरीदी की जरूरत के साथ पहले से उपलब्ध सामग्री के उपयोग और उसकी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। नगर पालिका को मिले प्रस्ताव के अनुसार वार्ड क्रमांक 1, 9 और 17 में डेस्क-बेंच वार्ड क्रमांक 2 में एलईडी लाइट तथा वार्ड क्रमांक 13 सहित अन्य वार्डों में आरसीसी और स्टील कुर्सियों की खरीदी प्रस्तावित है। नई सामग्री की जरूरत संबंधित वार्डों की मांग और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर तय की गई है ऐसा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा कहा गया है लेकिन पारदर्शिता की दृष्टि से यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि पूर्व में खरीदी गई समान सामग्री वर्तमान में कितनी संख्या में उपलब्ध है और उसका उपयोग किन स्थानों पर किया जा रहा है।
पालिका में पहले की खरीदी भी रही है चर्चा में
नगर पालिका में खरीदी से जुड़े मामले पहले भी चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2023 में करीब 37.73 लाख रुपए के जिम उपकरणों की खरीदी को लेकर शिकायत सामने आई थी। जांच में खरीदी प्रक्रिया से संबंधित नियमों के उल्लंघन तथा भुगतान के बावजूद सामग्री की खरीदी नहीं होने जैसे बिंदु सामने आए थे। इस मामले में तत्कालीन सीएमओ को निलंबित किया गया था। इसके बाद आरसीसी सीमेंट कुर्सियों की खरीदी को लेकर भी उनकी संख्या उपलब्धता और उपयोग को लेकर सवाल सामने आए थे। इसी अवधि में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र वर्मा के इस्तीफे और कांग्रेस से भाजपा में प्रवेश का मामला भी सुर्ख़ियों एवं विवादों में रहा। वर्मा ने इस्तीफे से इनकार करते हुए इसे फर्जी बताया था और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। बाद में इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
इन पुराने मामलों का उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई खरीदी के प्रस्तावों के बीच नगर पालिका की खरीदी प्रक्रिया रिकॉर्ड और सामग्री के उपयोग को लेकर सार्वजनिक स्तर पर पारदर्शिता की अपेक्षा स्वाभाविक है।
जनता के धन के उपयोग पर स्पष्टता का संदेह बरकरार
नगर पालिका को मिलने वाला बजट सार्वजनिक धन है और उसका इस्तेमाल नागरिक सुविधाओं के लिए किया जाता है। इसलिए किसी भी नई खरीदी में आवश्यकता उपलब्ध बजट गुणवत्ता और उपयोगिता के साथ यह देखना भी जरूरी है कि पहले से खरीदी गई सामग्री का अधिकतम उपयोग हो रहा है या नहीं।
यदि किसी वार्ड में पहले से उपलब्ध कुर्सियां या डेस्क-बेंच उपयोग योग्य हैं तो उनका इस्तेमाल किया जाना सार्वजनिक धन के बेहतर प्रबंधन की दिशा में कदम हो सकता है। वहीं यदि पुरानी सामग्री क्षतिग्रस्त हो चुकी है या संबंधित स्थानों की जरूरत पूरी नहीं कर पा रही है तो नई खरीदी का औचित्य स्पष्ट किया जा सकता है।
भौतिक सत्यापन से दूर हो सकते हैं सवाल
नई खरीदी को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नगर पालिका द्वारा पुराने स्टॉक का भौतिक सत्यापन, वितरण विवरण और वर्तमान उपयोग की जानकारी सार्वजनिक करने से हो सकता है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित खरीदी वास्तव में अतिरिक्त आवश्यकता को पूरा करने के लिए है या पहले से उपलब्ध संसाधनों के स्थान पर की जा रही है। नगर पालिका की ओर से यदि प्रस्तावित खरीदी की मात्रा, अनुमानित लागत, संबंधित वार्डों की मांग और पुरानी सामग्री की स्थिति की जानकारी सार्वजनिक की जाती है तो नागरिकों के बीच बनी जिज्ञासा और सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिल सकेगा। फिलहाल मुद्दा नई सामग्री की खरीदी के विरोध का नहीं बल्कि खरीदी की आवश्यकता उपलब्ध संसाधनों के उपयोग और सार्वजनिक धन के पारदर्शी इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता का है। बहरहाल मामले में नगर पालिका की ओर से कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है ऐसे में पालिका की ओर से पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।

