
लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अस्थिरता पर लगेगा विराम?

लंबित फाइलों के निपटारे और विकास कार्यों में आएगी तेजी?
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। लंबे समय से प्रशासनिक अस्थिरता से जूझ रही खैरागढ़ नगर पालिका परिषद को आखिरकार स्थायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिल गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पुनीत राम वर्मा को खैरागढ़ नगर पालिका परिषद का नया मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति से नगर में प्रशासनिक कामकाज को गति मिलने और रुके हुए विकास कार्यों के आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले कई महीनों से नगर पालिका में स्थायी सीएमओ की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक कार्यों में सुस्ती देखी जा रही थी। कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबित रही है और विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी देरी हो रही थी। ऐसे में शासन द्वारा पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति को नगर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है!
दुकान नीलामी विवाद के बाद पालिका में ठप्प पड़ गया कामकाज
दरअसल नवंबर 2025 में नगर पालिका उस समय विवादों में आ गई थी जब दुकान नीलामी से जुड़े मामले में तत्कालीन सीएमओ और प्रभारी अधिकारी का नाम सामने आया और मामले की जांच के बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था जबकि मामले में सीएमओ की गलती नहीं बताई जा रही थी। इसके बाद खैरागढ़ नगर पालिका की जिम्मेदारी गंडई नगर पंचायत के सीएमओ अविनाश देवांगन को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दी गई थी। अतिरिक्त प्रभार से धीमा पड़ा कामकाज एक ही अधिकारी के पास दो नगरीय निकायों की जिम्मेदारी होने के कारण खैरागढ़ नगर पालिका के कामकाज की गति प्रभावित होने लगी थी। फाइलों के लंबित रहने से कई योजनाओं पर निर्णय नहीं हो पा रहे थे और छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा था। इससे आम नागरिकों में असंतोष भी बढ़ने लगा। नगर में स्थायी सीएमओ की नियुक्ति को लेकर सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के पार्षदों ने भी शासन से मांग की थी कि नगर के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति जरूरी है।
खैरागढ़ पालिका में यह साल है चुनावी वर्ष
गौर तलब है कि खैरागढ़ नगर पालिका में चुनाव इसी वर्ष प्रस्तावित हैं जो इस साल के अंत तक होगा। ऐसे में प्रशासनिक निर्णयों में हो रही देरी और विकास कार्यों की धीमी गति राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मुद्दा बनती जा रही थी। सड़क, सफाई, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर लोगों की शिकायतें आम हो गई है। ऐसे समय में पूर्णकालिक सीएमओ की नियुक्ति को प्रशासन का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नये सीएमओ के सामने ये होंगी प्राथमिक चुनौतियां
नये सीएमओ के सामने कार्यभार संभालते ही कई प्राथमिक चुनौतियां सामने होंगी जिसमें
नगर पालिका के लंबित प्रशासनिक मामलों का त्वरित निपटारा, दुकान नीलामी विवाद के बाद बनी नकारात्मक छवि को सुधारना, वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करना व
सड़क, सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना शामिल है वहीं चुनाव से पहले रुके विकास कार्यों को गति देना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।